अलीगढ़। कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। कोर्ट द्वारा हिजाब को लेकर दायर याचिका पर दिए गए इस फैसले से संत समाज के लोगों में काफी खुशी है और उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।हीं है। तो वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती (Mahamandaleshwar Annapurna Bharti) ने मांग की है कि कोर्ट ने माना है हिजाब और बुर्का इस्लाम का अनिवार्य परिधान नहीं है। इसलिये हिजाब को पूरे भारत में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। बुर्के में तमाम लोग अपनी पहचान छिपाने में कामयाब हो रहे हैं जो कि देश की अखंडता पर खतरा है।
Read also: कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब मामले में वकीलों को इस हफ्ते तक बहस पूरी करने का निर्देश दिया
अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव एवं महामंडलेश्वर डॉक्टर अन्नपूर्णा भारती (Mahamandaleshwar Annapurna Bharti) ने कर्नाटक में शुरू हुए हिजाब मामले को लेकर कर्नाटक सहित पूरे देश में हिजाब पर उठे विवाद के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट की तरफ से हिजाब मामले पर दिए गए फैसले का संत समुदाय की तरफ से स्वागत किया गया है। दरअसल कर्नाटक हाईकोर्ट में हिजाब को लेकर एक याचिका दायर की गई थी। उच्च न्यायालय में हिजाब को लेकर दायर की गई उस याचिका को कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हिजाब इस्लाम धर्म का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकार रखा है। वहीं, अदालत के इस फैसले के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राएं सहित देश में मुस्लिम समुदाय की महिलाएं और अन्य कई वर्ग के लोग इसके विरोध में भी हैं।लेकिन संत समुदाय फैसले का स्वागत करते हुए सभी को इस फैसले को मानने की अपील भी कर रहा है।
Read also: सीपीएम ने हिजाब मामले में केंद्रीय शिक्षामंत्री से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
अलीगढ़ में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे एवं महामंडलेश्वर डॉक्टर अन्नपूर्णा भारती ने भी हिजाब मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का लिया गया यह निर्णय सराहनीय है। जबकि अब भारत में हिजाब को लेकर दिए गए कोर्ट के इस निर्णय को पूरी तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने वक्तव्य में सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्वीकार किया है कि हिजाब और बुर्का इस्लाम का अनिवार्य परिधान नहीं है। जबकि इसे पूरे भारत में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। बुर्के में तमाम लोग अपनी पहचान छिपाने में कामयाब हो रहे हैं जो कि देश की अखंडता पर खतरा है।

