प्रदेश में अब कोरोना का संक्रमण कम हुआ तो वहीं दूसरी ओर डेंगू के बढ़ते मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियों को बढ़ा दिया है। मेरठ मंडल में इन दिनों डेंगू की दस्तक हो चुकी है। अब तक मेरठ सहित मंडल में करीब 40 केस डेंगू के मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू रोकथाम व बचाव के लिए प्रभावित जिलों को गहन निगरानी करने के निर्देश के साथ ही मलेरिया विभाग को दवा छिड़काव का भी आदेश दिया है। मेरठ ओर आसपास के जिलों में अब कारोना संक्रमितों की रफ्तार धीमी होने से स्वास्थ्य विभाग को राहत मिली थी। लेकिन इसी राहत के बीच ही डेंगू संक्रमण ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी डेंगू से स्थिति बेकाबू नहीं है। लेकिन वहीं इसके अलट निजी चिकित्सकों के यहां डेंगू के मरीजों की लाइन लग रही है। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम व बचाव की कवायद अभी से शुरू कर दी है। मेरठ और गाजियाबाद में डेंगू की स्थिति अब खराब हो रही है। आसपास के जिलों में लगातार डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट लैब को जांच में डेंगू लिखने को मना किया है। इसके लिए पहले सरकारी लैब में जांच करवाई जाएगी। उसके बाद वहां से पुष्टि होने पर ही निजी लैब वाले जांच में डेंगू लिख सकेगे।
हालांकि राहत की बात है कि अभी तक डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई है। बता दें कि वर्ष 2019 में डेंगू संक्रमण तेजी से फैला था। मेरठ और मंडल में उस दौरान डेंगू के करीब 321 मरीज सामने आए थे। वहीं 2020 व 2021 में कोविड महामारी के दौरान डेंगू का प्रभाव पूरी तरह से ना के बराबर ही रहा था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हर दो या तीन साल बाद डेंगू का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से सभी जिलों को डेंगू की रोकथाम व बचाव के लिए एसओपी जारी की थी। सीएमओ डा0 अखिलेश मोहन ने बताय ाकि प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। डेंगू मरीज मिलने पर आसपास के घरों में स्क्रीनिंग कर जांच कराई जाती है। डेंगू के लार्वा के लिए सर्वे करने के साथ फॉगिंग करने के निर्देश दिए गए है। डेंगू मरीजों के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। इसी के साथ अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं।

