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हाथरस प्रकरणः सरकार के हलफनामे पर उठते सवाल


हाथरस प्रकरणः सरकार के हलफनामे पर उठते सवाल

सुनील शर्मा

हाथरस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का जवाब देते हुए यूपी सरकार ने जो हलफनामा दाखिल किया है वह कोर्ट को भले ही संतुष्ट कर दे मगर इसी हलफनामे से उठे सवाल सरकार की छवि को प्रभावित कर रहे हैं। यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गयी फोरेंसिक रिपोर्ट में भी रेप के सबूत न मिलने का जिक्र किया गया है। वहीं पीड़िता की मौत के बाद रात के अंधेरे में किये गये अंतिम संस्कार के बाद भड़के आक्रोश को सरकार दंगे भड़काने की साजिश बता रही है। गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले के कई मुकदमें दर्ज किये हैं और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। सरकार का दावा और कार्रवाई सही हो सकती है मगर इस राजशैली से कहीं न कहीं सरकार की छवि अवश्य प्रभावित हो रही है। यदि सरकार का यह कदम सही है भी तो यह गलत समय पर उठाया गया है जो सीएम योगी की स्वच्छ और सुशासक छवि को प्रभावित कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक याचिका की सुनवाई में यूपी सरकार द्वारा हाथरस की पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार रात में किये जाने पर हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा गया है कि अगले दिन यानि 30 सितंबर को रामजन्म भूमि केस में फैसला आना था जिस कारण जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। वहीं हलफनामे में यह भी कहा गया कि शव का अंतिम संस्कार सुबह किये जाने पर भीड़ जुटने की संभावना थी जिसके कारण कोरोना संक्रमण फैल सकता था। वहीं भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के जुट जाने के कारण जातीय संघर्ष फैलने की आशंका को भी सरकार ने एक वजह बताया। कहा गया कि इंटेलिजेंस इनपुट में 30 सितंबर की सुबह दोनों समुदाय के लाखों लोगों के सुबह गांव में जुटने से हिंसा की संभावना भड़कने की आशंका थी। यह हलफनामा संभवतः सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर दे मगर हाथरस प्रकरण में कई सवाल अब भी हैं जो अनुत्तरित हैं और सरकार को चाहिये कि वह उन सवालों का जवाब जनता को अवश्य दे ताकि इस प्रकरण में उसकी छवि पर लगे दागों को दूर किया जा सके।

निःसंदेह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि एक अच्छे शासक की है। उत्तर प्रदेश के बाहुबलियों पर की गयी सख्त कार्रवाई ने उनकी छवि में चार चांद लगा दिये थे। मगर हाथरस प्रकरण में कहीं न कहीं उनके शासन पर सवाल उठे हैं। सरकार को चाहिये की वह अदालतों के साथ जनता की अदालत में भी अपना पक्ष सबूतों के साथ रखे। दुष्कर्म को एक सिरे से नाकार देना, जबरिया अंतिम संस्कार कराना और हाथरस प्रकरण का सच सामने लाये बिना राजनीतिक दलों, संगठनों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराना, गिरफ्तारी करना जैसे अनेक कदम हैं जो कानूनी तौर पर सही हो सकते हैं मगर आम जनमानस के गले नहीं उतर रहे। सरकार को चाहिये कि वह दमनकारी नीति अपना रहे अधिकारियों से किनारा करे और धैर्यपूूर्वक हालातों का सामना करे। क्योंकि गलत वक्त पर उठाया गया सही कदम भी गर्त में ले जाता है।

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