मरीज को भर्ती कराने या जांच के लिये स्ट्रेचर पर ले जाने की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं तीमारदार
मेरठ। जिला मेरठ का मेडिकल काॅलेज में मरीजों को तमाम सुविधाएं देने का दावा तो किया जाता है मगर यहां आने वाले मरीज से लेकर तीमारदार तक को परेशान होते अक्सर देखा जाता है। ऐसा सिर्फ कोरोना काल के कारण नहीं बल्कि सामान्य दिनों में भी मेडिकल काॅलेज आने वाले को स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को खुद ही खींच कर ले जाते हुए तीमारदार दिख जायेंगे। ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें परिवार के लोग ही मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाते दिख रहे हैं।
बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर दूर-दूर से लोग मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल काॅलेज आते हैं। मगर मेडिकल काॅलेज में तमाम सुविधाएं, संसाधन और विशाल स्टाॅफ के बावजूद मरीज की देखभाल खुद परिवारजनों को ही करनी पड़ती है। हाल ही में एक महिला ने ब्लैक फंगस से पीड़ित अपने बच्चे का उपचार न होने का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि बिस्तर गीला हो जाने के बाद उसके कपड़े तक नहीं बदले गये और यह काम उसे खुद करना पड़ा।
अब एक वायरल वीडियो में एक परिवार अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लादकर ले जाता हुआ दिख रहा है। एक व्यक्ति हाथ में ग्लूकोज की बोतल थामे चल रहा है तो बाकी लोग स्ट्रेचर को खींच रहे हैं। मेडिकल काॅलेज में इलाज करवाने आये लोगों को अपना मरीज खुद ही वाहन से उतारकर स्ट्रेचर पर लिटाना पड़ता है। इसके बाद शुरू होती है मरीज को भर्ती करने की कयावद। फिर डाॅक्टर मरीज की जांच के लिये लिख देते हैं। अब यदि मरीज की जांच समय से करा कर उसका इलाज शुरू कराना है तो फिर उसे बेड से उठाकर स्ट्रेचरर पर लिटाने और लैब-एक्सरे रूम आदि जगहों पर ले जाने का काम खुद परिवार के लोगों को ही करना पड़ता है। वरना बैठो रहो स्टाॅफ के आने की इंतजार में जो न जाने कब मेहरबान होगा और पता नहीं होगा भी के नहीं। ऐसे में लोग मजबूरी को देखते हुए खुद ही अपने मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर ले जाने के लिये मजबूर हैं। मगर किसी मरीज के साथ यदि लोग न हुए या सिर्फ महिला तीमारदार हुई तो उनकी जांच कैसे होती होगी यह आप खुद ही समझ सकते हैं।

