देहरादून। सरकारी नौकरियों का दलाल हाकम सिंह रावत को अब तक पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। हाकम सिंह ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया कि उसने हरिद्वार से इस धंधे की एबीसी सीखी थी। हाकम सिंह पेपर लीक करवाने और सरकारी नौकरियां लगवाने के मामले में अब तक अकूत संपत्ति बना चुका है। पैसा कमाने के लिए हाकम सिंह ने सत्ता की सीढ़ियों का इस्तेमाल किया। वह लगातार कद्दावर नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने जाता था। हाकम सिंह रावत एक समय पैसों की गंभीर तंगी से जूझ रहा था। किसी के माध्यम से उसने उत्तरकाशी के एक प्रशासनिक अधिकारी के घर कुक की नौकरी की थी। कुछ दिनों बाद अधिकारी का ट्रांसफर हरिद्वार हुआ तो वह हाकम सिंह को अपने साथ ले गए। जहां वह अधिकारी का प्राइवेट ड्राइवर बन गया था। हरिद्वार में वह कुछ प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आया और उसे पेपर लीक धंधे की एबीसी पता चलती चली गई।
Read also: CM Yogi Adityanath: बलिया पहुंचे सीएम योगी, जिले को दी मेडिकल कालेज की सौगात
इसके बाद उसने धीरे-धीरे अपनी पैठ रसूखदार लोगों में बनाई। उसके कई अधिकारियों से संपर्क हुए कि वे उसे घर का सदस्य भी मानने लगे। वर्ष 2008 में जब वह पंचायत की राजनीति में सक्रिय हुआ तो उसने बड़े लोगों के साथ फोटो खिंचवाने को रणनीति का हिस्सा बना लिया। इससे उसकी जान-पहचान का दायरा और बढ़ता चला गया। वर्ष 2019 के पंचायत चुनाव में हाकम सिंह जिला पंचायत सदस्य बना। इसके बाद यहीं से हाकम सिंह ने अपना असली खेल शुरू किया। जिला पंचायत राजनीति में आकर उसने कई बड़े अधिकारियों और नेताओं के बीच पहचान बना ली। वर्तमान में वह रिजॉर्ट, सेब के बागान, होटल और खनन के कारोबार का बड़ा व्यापारी है। अवैध धन से अर्जित संपत्तियों में उसका सांकरी स्थित रिजार्ट बताया जाता है। जानकारों के मुताबिक पूरे उत्तरकाशी जिले में इससे आलीशान रिजॉर्ट नहीं है। एसटीएफ उसकी संपत्ति के बारे में भी जानकारी कर रही है।

