ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिन्दू पक्ष को उस समय बड़ी राहत मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में मिले कथित शिवलिंग के संरक्षण के आदेश को बरकरार रखा. शीर्ष अदालत ने इससे पहले शिवलिंग के संरक्षण का जो आदेश दिया था वो 12 नवंबर को समाप्त हो रहा था, ऐसे में हिन्दू पक्ष ने शीर्ष अदालत से इस मामले में जल्द सुनवाई की अपील की थी जिसे उच्चतम न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था. आज हुई सुनवाई में संरक्षण का आदेश आगे भी जारी रखने के साथ ही अदालत ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर प्रतिपक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का भी निर्देश जारी किया. शीर्ष अदालत ने इससे जुड़े लंबित सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए उन्हें जिला जज के सामने दाखिल करने का निर्देश दिया है.
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जानकारी देते हुए आज की सुनवाई के बारे में बताया, उन्होंने कह कि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे कमिश्नर की नियुक्ति के बारे में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद कमेटी की याचिका पर हिंदू पक्षों को तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है. CJI चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इससे पहले गुरुवार को हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि कथित शिवलिंग के संरक्षण का आदेश 12 नवंबर को समाप्त हो रहा है, इसको और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.
विष्णु शंकर जैन ने त्वरित सुनवाई का ज़िक्र करते हुए हुए कहा था कि शिवलिंग वाले क्षेत्र के संरक्षण के आदेश की अवधि 12 नवंबर को समाप्त हो जाएगी. हिंदू भक्तों की याचिका जिसमें मस्जिद परिसर में रोज़ाना पूजा अर्चना की मांग की गयी थी उसकी सुनवाई को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका के बारे में सवाल परजैन ने बताया था कि निचली अदालत ने इसे खारिज कर दिया था और अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील लंबित है. बता दें कि शीर्ष अदालत ने 17 मई को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर उस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था जहां कथित शिवलिंग मिला था.

