Gujarat Chunavi Dangal: इस साल के अंत मे गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने को है। दोनो ही राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी की सत्ता है। वही अगर हम बात गुजरात की करें तो लोग इसे भाजपा के गढ़ के नाम से जानते हैं यहां पिछले 25 वर्ष से भाजपा का सत्ता पर आधिपत्य स्थापित है। लेकिन इस भारत गुजरात मे भाजपा की राह कठिन हो गई है क्योंकि यहां कांग्रेस इसे पहले से ही करारी टक्कर दे रही थी कि अब यहां की राजनीति में आप ने शिरकत की है।
बीजेपी ने अपनाई इस्तीफे की राजनीति:-
वही भाजपा अब गुजरात मे अपनी छठवीं बार जीत दर्ज करने के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने में जुट गई है। सत्ता वापसी के लिए भाजपा ने रणनीति बनाना तब ही शुरू कर दिया था जब भाजपा ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को बदलकर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी थी।
उस समय कोविड का दौर चल रहा था जनता भाजपा से कही न कही खिन्न थी वही भाजपा के बड़े नेताओं ने गुजरात की जनता का यह वर्ताव बदलने के लिए मुख्यमंत्री बदलने की रणनीति पर काम किया और न सिर्फ गुजरात के मुख्यमंत्री को बदला बल्कि लगभग पूरा मंत्रिमंडल ही बदल डाला। माना गया कि लोगों की नाराज़गी कम करने के लिए यह क़दम उठाया गया था।
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मुख्यमंत्री बदलने की नीति सिर्फ भाजपा ने गुजरात मे ही नहीं अपनाई अपितु उत्तराखंड में भी भाजपा ने इसी नीति पर काम किया और वहां पुनः अपनी सरकार बना ली। वही अब विशेषज्ञ का कहना है कि भाजपा मुख्यमंत्री बदलने की नीति से गुजरात भेदने की योजना बना रही है और विपक्ष को मात देने की फिराक में है। वही गुजरात में भाजपा के तुरुप कहे जाने वाले नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनो का ग्रह राज्य है अब अगर गुजरात मे भाजपा की हार होती है तो यह मोदी और शाह के लिए बड़ी समस्या साबित हो सकती है। वैसे तो गुजरात मे 1995 से भाजपा सत्ता में है।
कांग्रेस की फुट बनेगी बीजेपी के लिए संजीवनी बूटी:-
अगर हम वर्तमान में कांग्रेस की स्थिति की बात करें तो गुजरात कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह मची हुई है अभी हाल ही में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने पार्टी का हाँथ छोड़ा है और अब यह पार्टी के विरोध में आक्रमक रुख अपनाए हुए हैं। आय दिन गुजरात मे हार्दिक और कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग देंखने को मिल रही है हार्दिक लगातार कांग्रेस की आलोचना करते नजर आ रहे हैं वही कांग्रेस के नेता हार्दिक के बदले स्वरूप को उनका खौफ बता रहे हैं।
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लेकिन यदि हम चुनावी परिधि के भीतर से देखे तो भाजपा को हार्दिक और कांग्रेस की ओपन जंग का खूब फायदा मिल सकता है। क्योंकि हार्दिक पाटीदार समाज के नेता रहे हैं लेकिन अब जब इनकीं और कांग्रेस की जंग छिड़ी हुई है तो इसका फायदा उठाकर भाजपा अपना वोट बैंक मजबूत कर सकती है और कांग्रेस की रीढ़ तोड़ सकती है।

