Gujarat Chunavi Dangal कल जबसे कांग्रेस पार्टी और प्रशांत किशोर का राजनीतिक रिश्ता टूटा है, तब से मीडिया इस पूरे मामले के पोस्टमार्टम में जुटी हुई है। कल तक प्रशांत किशोर की कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के दिन तारीख की भविष्यवाणी करने वाले पत्रकार आज बता रहे हैं कि इस रिश्ते में दरार कब पड़ी। अभी बहस इस बात पर चल रही है कि प्रशांत किशोर और कांग्रेस के रिश्तों का चैप्टर बिलकुल क्लोज हो गया या फिर अभी भी प्रशांत किशोर से कांग्रेस सलाह लेगी, इसका जवाब कांग्रेस पार्टी के ओरिजिनल PK यानि पवन खेड़ा ने दिया। पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस के खिड़की दरवाज़े किसी के लिए बंद नहीं हुए हैं।
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तो क्या कांग्रेस के ओरिजिनल PK के इस बयान से यह मान लिया जाय कि कांग्रेस के होते होते रह जाने वाले PK का पार्टी बाहर से समर्थन ले सकती है, क्या प्रोफेशनल PK अब भी कांग्रेस की परदे के पीछे से रहनुमाई कर सकते हैं विशेषकर उन राज्यों में जहाँ वह किसी और ग़ैर भाजपाई या गैर कांग्रेसी दल की मदद न कर रहे हों। ऐसा होना संभव है, क्योंकि IPAC को भी तो काम चाहिए, अगले दो सालों में आधा दर्जन से ज़्यादा राज्यों में चुनाव हैं और यह वो राज्य हैं जहाँ भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर है, प्रशांत किशोर और उनकी टीम के लिए मैनेज करना भी ज़्यादा मुश्किल नहीं होगा।
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शायद यही वजह रही कि प्रेस कांफ्रेंस में पवन खेड़ा ने प्रशांत किशोर के विषय से बचने की कोशिश की लेकिन जब पीछा नहीं छूटा तो जवाब ऐसा दिया कि सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है. फ़िलहाल अगर गुजरात की बात करें तो नरेश पटेल का चैप्टर क्लोज लग रहा है क्योंकि खबर मिली है कि पाटीदारों की कुलदेवी के ट्रस्ट ने नरेश पटेल के राजनीति में उतरने के लिए जो सर्वे किया है उसमें ज़्यादातर पाटीदारों की राय यह है कि नरेश पटेल राजनीति में न जाकर बाहर से ही समुदाय की भलाई के लिए काम करें, उधर हार्दिक का ट्विटर हैंडल भी आज खामोश है.

