Gujarat Chunavi Dangal: कांग्रेस के सोमनाथ पर भाजपा ने डाली नजर , चलेगी बड़ा दांव

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Gujarat Chunavi Dangal –  गुजर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जहाँ सभी दलों ने अपनी अपनी कमर कस ली है। वही गुजरात की गिरी सोमनाथ सींट पर सियासी घमासान जारी है। क्योंकि यह सींट गुजरात की महत्वपूर्ण सींट है और प्रत्येक दल इस सींट पर अपनी धाक जमाने की कोशिश में लगी है। क्योंकि यह सिर्फ एक सींट नहीं बल्कि गुजरात का ह्रदय कही जाती है और इस सींट का अपना एक अलग इतिहास है। 

अगर हम सोमनाथ सींट की बात करे तो पहले सोमनाथ जिला पहले जूनागढ़ जिला में शामिल था. इसकी सीमा भेसान से लेकर ऊना तक और विसावदर से लेकर पोरबंदर तक थी। इस जिले का नाम सोमनाथ भगवान सोमनाथ और गिरी के जंगल पर रखा गया। वही गिरी अब सोमनाथ की पहचान बना हुआ है। वही अगर हम राजनीतिक परिपेक्ष्य से देखे तो सोमनाथ की राजनीति में सोमनाथ के मंदिर की अहम भूमिका है। गिरी सोमनाथ में चार विधानसभा सींटो पर चुनाव होता है। जिसमें ऊना, सोमनाथ, कोडीनार और तलाला सींटें है।

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इन सींटो पर कांग्रेस का दबदबा बना हुआ है और वर्ष 2017 में लाख कोशिशों के बाबजूद भी भाजपा यहाँ एक भी सींट नहीं जीत सकी। लेकिन इस बार भाजपा इन सींटो पर अपना दबदबा बनाने की पूरी कोशिश करेगी और इस सींट को हासिल करने के लिए कोई बड़ा राजनीति दाव खेल सकती है। हालाकि इस विधानसभा सींट पर 13 बार चुनाव हुआ है। इस 13 बार के चुनाव में 8 बार कांग्रेस, 2 बार भाजपा और 3 बार अन्य को।जीत हासिल हुई है। 

लेकिन भाजपा इस बार यहां अपनी जीत का दबदबा बनाने की पूरी कोशिश करेगी। मोदी मैजिक चलाने के लिए भाजपा ने काशी कॉरिडोर के बाद सोमनाथ मंदिर को गुजरात का मुद्दा बनाने की योजना बनाई है। जानकारो का कहना है कि सोमनाथ को जीतने के लिए भाजपा सोमनाथ मंदिर से लेकर गिरी के जंगल को मुद्दा बनाकर मैदान में खड़ी हो सकती है। क्योंकि सोमनाथ मंदिर के चारो ओर गंदगी फैली दिखाई दे रही है। जो इसके आकर्षण को फीका करती है। अब भाजपा इसपर काम करके सोमनाथ की जनता का ध्यान अपने विकास के मॉडल की ओर आकर्षित करना चाहती है। 

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वही राजनीतिक विशेषज्ञयों का कहना है कि 2022 में गुजरात विधानसभा के चुनाव होने हैं। बीजेपी और कांग्रेस  समान जाति के उमीदवार को टिकट देते हैं. ऐसे में कोली समाज के मतों का बंटवारा होता है। वही यहाँ मछुआरों और मुस्लिम समाज की भी बड़ी आबादी है जो की यहाँ की जीत हार को तय करती है। अब अगर भाजपा अपने हिन्दू विज्ञान से उठकर निकलती है तो उसका हिन्दू वोट बैंक प्रभावित होगा और अगर हिन्दू तक सीमित रहती है तो मुस्लिम।

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