लाइफस्टाइल डेस्क। Golden Langur Assam – असम उत्तर पूर्व का सबसे पुराना राज्य है, इसे अजूबों की धरती भी कहा जाता है। ये राज्य प्रकृति की गोद मे बसा हुआ है, जो अपनी खूबसूरती से सबका मन मोह लेता है। लेकिन खूबसूरत राज्य होने के साथ ही ये एक खास जीव के लिए काफी प्रसिद्ध है, जो की है Golden Langur । जी हां, ये एक ऐसा राज्य है जहां आपको Golden Langur देखने को मिलते है, लोग सिर्फ इन्हे देखने के लिए दूर – दूर से आते है। अगर आप भी कभी असम घूमने जाये तो Golden Langur को देखना ना भूले।
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कहां देखने को मिलेंगे Golden Langur?

गोल्डन लंगूर आपको चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य में देखने को मिल जाएगा, ये भारत का दूसरा गोल्डन लंगूर के निवास स्थान के लिए प्रसिद्ध है। यहां गोल्डन लंगूर के अलावा 14 विभिन्न प्रजातियों की सब्जियों, 60 प्रकार की मछली और उभयचर की 11 प्रजातियों के अलावा पक्षियों की 273 प्रजातियों को देख सकते हैं। इसके अलावा, यहां दो झीलें हैं, जो की इस पार्क में एक आकर्षण का केंद्र भी है। इन झीलों को धीर बील और डिप्लाई बील कहा जाता है जो वन्यजीव अभयारण्य की दोनों तरफ है। बता दे, ये पार्क पहले एक आरक्षित वन था, लेकिन वर्ष 1994 में इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
आप मानस नेशनल पार्क भी जा सकते है, यहां हेपीड खरगोश, गोल्डन लंगूर और पैगी हॉग जैसे जीवों को देख सकते है। ये असम के गुवाहाटी में है, इस अभयारण्य में दुर्लभ वन्य जीव पाए जाते हैं। जिहने लोग दूर-दूर से देखने के लिए आते है। इसके अलावा, ये पार्क विश्व धरोहरों में भी शामिल है।
आपकी जानकरी के लिए बता दे असम का पड़ोसी देश भूटान के ब्लैक पर्वत की तलहटी में गोल्डन लंगूर देखने को मिल जाते है साथ ही हिमालय क्षेत्र में लोग Golden Langur को पवित्र वन्यजीव मानकर पूजा भी करते हैं।
कैसे दिखते है ये Golden Langur?

गोल्डन लंगूर की चमड़ी सुनहरे रंग की होती है और बाल गहरे पीले रंग के होते हैं। इनकी 20 इंच लंबी पूंछ होती है जो इन्हे पेड़ की शाखाओं पर संतुलन बनाने में मदद करती है। खास बात ये है की उनके फर मौसम के अनुसार रंग बदलते हैं। है न दिलचस्प?
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Golden Langur की प्रजातियां
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत Golden Langur को संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में रखा गया है जबकि आईयूसीएन ने इसे संकटापन्न वन्यजीव की श्रेणी में रखा हुआ है। साथ ही 2011 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली ने Golden Langur के संरक्षण, प्रजनन के लिये राज्य के चिड़ियाघर को एक परियोजना सौंपी और वर्ष 2009 में असम में इनकी अनुमानित संख्या 5,140 थी। 2020 में लॉकडाउन और कोविड-19 के कारण में जनगणना पूरी नहीं हो सकी।

