गिरिजा देवी मंदिर जहां कभी शेर भी किया करते थे परिक्रमा

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गिरिजा देवी मंदिर जहां कभी शेर भी किया करते थे परिक्रमा

पारुल सिंघल

उत्तराखंड के रामनगर में स्थित इस मंदिर में मिलता है अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान

गर्जिया देवी मंदिर या गिरिजा देवी मंदिर उत्तराखंड के लोगों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां रामनगर स्थित सुंदरखाल गांव में बना यह मंदिर असीम शांति और भक्ति से ओतप्रोत है। गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माँ पार्वती के इस मंदिर का नाम गिरिजा देवी पड़ा। कभी अत्यधिक घने जंगलों में बने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार आजादी के बाद ही हुआ था और तभी से यहाँ भक्तों का तांता लगना शुरू हुआ।

गिरिजा देवी मंदिर जहां कभी शेर भी किया करते थे परिक्रमा

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शेर भी करते हैं परिक्रमा

गिरिजा देवी मंदिर सैकड़ों साल पहले जंगलों से घिरा हुआ था। सन 1940 में यहां स्थानीय लोगों ने इस जगह पर माता वैष्णवी के उपस्थित होने का एहसास हुआ। यही नहीं उस वक्त जंगल विभाग के कर्मचारियों व अन्य लोगों ने जब यहां जाकर देखा तो उन्हें कुछ मूर्तियां भी दिखाई दी और गांववालों ने छोटे से मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया। इसके बाद दुर्गम रास्ते से होते हुए टीले पर बने इस मंदिर में श्रद्धालु जनों का आना जाना शुरू हुआ। यह भी मान्यता है कि यहां अक्सर शेर भी मंदिर की परिक्रमा करते दिखाई दे जाते थे। लोगों को शेर की भयंकर गर्जना भी सुनाई देती थी ।

बिना भैरव अधूरे हैं दर्शन

गिरजा देवी मंदिर में मां पार्वती की गर्जिया माता के रूप में साढ़े 4 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। यहां पर देवी सरस्वती, गणेश, बटुक भैरव की भी मूर्तियां स्थापित है। ऐसा माना जाता है कि भैरव के दर्शन के बिना इस मंदिर की यात्रा अधूरी रहती है और भक्तों को इसका फल नहीं मिल पाता है। जनश्रुतियों के अनुसार बहुत समय पहले कोसी नदी की बाढ़ में किसी ऊंचे स्थान से बहते हुए कुछ मूर्तियां टीले की तरफ आ रही थी। इन्हें बहता हुआ आता देखकर भैरव देव ने रोकने का प्रयास किया और मूर्तियों को वही अपने साथ निवास करने के लिए आमंत्रित किया। मान्यता है कि इसके बाद से ही भैरव देव के दर्शन के बिना देवी की आराधना अधूरी रहती है।

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गिरिजा देवी मंदिर जहां कभी शेर भी किया करते थे परिक्रमा

संतान प्राप्ति के लिए आते हैं युगल

गिरिराज हिमालय की पुत्री और भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी देवी पार्वती को समर्पित गिरिजा देवी मंदिर में युगल जोड़े संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं। माना जाता है कि देवी की आराधना और सच्ची श्रद्धा से मांगी गई कामना यहां अवश्य पूरी होती है। इसके साथ ही देवी को नारियल और चुन्नी भी चढ़ाई जाती है। नवविवाहित युवतियां यहां आकर सच्चे मन से मां गिरिजा से अखंड सौभाग्यवती होने वरदान प्राप्त करती हैं।

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