बेटे को अवैध हिरासत में रखने और साक्ष्य मिटाने का आरोप, 30 मई तक मांगी गई रिपोर्ट
महिला बोली- पुलिस ने पहले उठाया, फिर अपराधी बताकर रची मुठभेड़ की कहानी
गाजियाबाद में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने जिले के 16 पुलिसकर्मियों पर फर्जी मुठभेड़ दिखाने, अवैध हिरासत में रखने और सबूत छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने वेव सिटी थाना पुलिस से 30 मई तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
महिला का आरोप है कि 11 मई को पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और उसके पति व बेटे को अपने साथ ले गए। कुछ देर बाद पति को छोड़ दिया गया, लेकिन बेटे सुहेल के साथ उसके परिचित जुबेर और फिरोज को पुलिस ने हिरासत में रखा। महिला का कहना है कि परिवार को लंबे समय तक युवकों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
अर्जी में दावा किया गया है कि बाद में पुलिस ने इन युवकों को अपराधी साबित करने के लिए फर्जी मुठभेड़ की कहानी तैयार कर दी। महिला ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और युवकों को बिना निष्पक्ष जांच के अपराधी घोषित कर दिया गया।
महिला के अधिवक्ता खालिद खान ने कोर्ट में कहा कि पुलिस की कार्रवाई मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट और मानवाधिकार आयोग द्वारा गिरफ्तारी व हिरासत को लेकर जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई। साथ ही पुलिस पर साक्ष्य छिपाने और मामले को दूसरी दिशा देने का भी आरोप लगाया गया।
महिला ने कोर्ट से अपने बेटे और रिश्तेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है। उसका कहना है कि परिवार लगातार भय के माहौल में जी रहा है और निष्पक्ष जांच के बिना सच सामने नहीं आ पाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वेव सिटी थाना पुलिस को पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अब पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद अदालत अगली कार्रवाई तय करेगी।
यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

