लखनऊ। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने यूपी के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। दिल्ली से वापसी के बाद लखनऊ पहुंचकर उन्होंने विधायक पद की शपथ ली और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) से मिलने उनके आवास 5केडी पहुंच गये। हालांकि दोनों ने इस मुलाकात को शिष्टाचारिक मुलाकात बताई है। लेकिन, अखिलेश यादव से शिवपाल यादव की नाराजगी के बीच इस मुलाकात के कई सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं।
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दिल्ली में अमित शाह से भी मिले!
अब सियासी गलियारे में यह सवाल खड़े होने लगे हैं कि विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाये जाने से शिवपाल यादव नाराज हैं। सहयोगी दलों की बैठक के ठीक पहले उन्होंने दिल्ली कूच कर लिया था। कहा जा रहा है कि उन्होंने वहां पर सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से तो मुलाकात की ही साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले हैं। हालांकि इसको लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि शिवपाल यादव और अमित शाह के बीच रिश्ते काफी अच्छे हैं। ऐसे में शिवपाल यादव सियासत के इस मंझधार में फंसे हुए हैं और अपने बेटे आदित्य को राजनीति में सेट करने के लिए बीजेपी का सहयोग भी ले सकते हैं।
अपर्णा यादव से भी शिवपाल के हैं अच्छे रिश्ते
मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के दूसरे बेटे और बहू से अखिलेश यादव के रिश्ते अब किसी से छिपे नहीं हैं। यही कारण है कि मुलायम की छोटी बहू अपर्णा ने चुनाव के ठीक पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। हालांकि अपर्णा के शिवपाल यादव से भी काफी अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में भाजपा से नजदीकियों की एक बड़ी कड़ी अपर्णा यादव भी बन सकतीं हैं।
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तमाम कोशिशों के बाद भी ठीक नहीं हो पाये रिश्ते
2017 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले समाजवादी पार्टी दो धड़ों में बंट गई थी। जिसके बाद अखिलेश यादव ने खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर शिवपाल यादव को बाहर कर दिया था। उसके बाद शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) ने भी अपनी प्रसपा बना ली थी। हालांकि 2017 के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी चाचा भतीजे अलग-अलग ही रहे। इस बीच तमाम कोशिशों के बाद कहा गया कि दोनों के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघल रही है। लेकिन, अखिलेश यादव की लगातार अनदेखी बीच-बीच में सामने आती रही। आखिरकार तमाम उलटफेर के बीच शिवपाल और अखिलेश एक साथ आ गये, लेकिन दोनों के रिश्तों में खटास साफ देखी जा सकती थी। शिवपाल ने अपने करीब 50 समर्थकों को चुनाव लड़ाने की सूची अखिलेश को सौंपी थी लेकिन सिर्फ शिवपाल को छोड़कर किसी को भी मौका नहीं दिया गया। यह नाराजगी लगातार बढ़ती रही। अखिलेश ने शिवपाल के बेटे प्रतीक को चुनाव लड़ाने से साफ इनकार कर दिया था। इसके बाद दोनों के रिश्तों में खाई और गहरी होती गई। अब चुनावी परिणाम आने के बाद दोनों के बीच की दूरियां साफ देखी जा सकतीं हैं।

