नई दिल्ली। नोयडा के सुपरटेक की एमेराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट को गिराने के एक अदालती आदेश भले पांच सालों तक कानूनी-दांव पेच में फंसा रहा हो, पर आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय ने इसे ध्वस्त कर देने का आदेश सुना ही दिया। गौर हो कि, साल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन टावर्स को गिराने का निर्देश दे दिया था, इसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सही माना और इसके निर्माण को नियमों का उल्लंघन करार दिया।
देश की सर्वोच्च अदालत ने नोयडा में सुपरटेक की एमेराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट्स के 40 मंजिला ऊंचे दो टावरों को, तयशुदा नियमों का उल्लंघन कर कंस्ट्रक्शन करने पर इसे ध्वस्त किये जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेशानुसार नोयडा एथॅरिटी की देखरेख में तीन महीने के भीतर सुपरटेक की 40 मंजिला दो इमारतों को ध्वस्त कर दिया जाय।
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सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार सुपरटेक के, 915 फ्लैट और दुकानों वाले 40 मंजिलों वाली दो इमारतों का निर्माण नोयडा प्रद्यिकरण के साथ मिलीभगत कर किया गया है।
अदालत ने यह निर्देश इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में दिए चैलेंज पर सुनाया है। ताजा निर्णय में कहा गया कि इमारतें को तोड़ते समय यह ध्यान रखा जाय कि अन्य भवनों को नुकसान न पहुंचे। गौर हो कि उच्च न्यायालय में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह ने इस केस की सुनवाई की और निर्णय सुनाया।
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गौरतलब है कि, स्रप्रीम कोर्ट ने बीती 3 अगस्त को हुई सुनवाई में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। उस समय भी कोर्ट से नोयडा एथॉरिटी को खूब डांट लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि एथॉरिटी को एक सरकारी नियामक इकाई की तरह पेश आना करना चाहिए था न कि किसी के लाभ की रक्षा के लिए एक पर्सनल इकाई की तरह काम करना चाहिये।

