मेरठ। मेरठ जैसे महानगर में वर्षों पहले हुए विक्टोरिया पार्क अग्निकांड के जख्म आज भी पीडितों के भरे नहीं है। इस भीषण अग्निकांड के इतने साल बाद भी आज मेरठ आग के मुहाने पर बैठा हुआ है। यह जानते हुए भी जिम्मेदारों ने मौन साधा हुआ है। शहर के अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हाल और रिसोर्ट ऐसा नहीं है। जहां पर अग्निशमन का अनापत्ति प्रमाण-पत्र हो और वहां पर फायर सिस्टम लगा हुआ हो। कुछ ऐसा ही हाल बड़े कोचिंग सेंटरों का भी है। जहां पर सैकड़ों की संख्या में छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। मेरठ महानगर के बीचों बीच खुले इस कोचिंग सेंटरों में से मात्र चंद के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है। इनके अलावा बाकी सभी रामभरोसे चल रहे हैं। अग्निशमन विभाग ने होटल, रेस्टोरेंट के एनओसी ना लेने की बात खुद भी स्वीकारी है।
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एक आरटीआई के जवाब में विभाग जो जानकारी दी है वह काफी चौकाने वाली है। विभाग की ओर जवाब दिया गया है कि महानगर के बैंक्विट हॉल, मंडप, होटल, रिसोर्ट्स ने अग्निशमन विभाग से किसी प्रकार की कोई एनओसी नहीं ली है। इनका अभी तक न तो कोई चालान किया गया और ना कोई जुर्माना वसूला है। शिक्षण संस्थानों को एनओसी जारी के बारे में जानकारी दी है कि इनको तीन से पांच साल के लिए एनओसी जारी की जाती है। इस समय मेरठ में करीब 275 से अधिक शिक्षण संस्थान हैं। जिनके पास दमकल का अनापत्ति प्रमाण पत्र नही है। वहीं महानगर में 300 से अधिक रिसॉर्ट्स, मंडप और होटल संचालित हो रहे हैं। इनके पास भी आग लगने के उपायों के बारे में कोई संसाधन मौजूद नहीं है। सीएफओ संतोष कुमार राय ने बताया कि रिपोर्ट बनाकर प्रशासन को भेजी जाती है।

