मेरठ। इस बाद होली दहन (Holika Dahan) सूर्यास्त पश्चात मध्य रात्रि के मध्य ही शुभ माना जा रहा है। इस प्रकार विशेष होली दहन मुहूर्त 9:20 रात्रि से 10:31 रात्रि तक का है। ये मुहूर्त भद्रा काल का पुच्छ काल अर्थात् वह काल है जिसमें भद्रा काल का दोष इस प्रकार नहीं लगता है जोकि मुखकाल में लगता है। भद्रा पृथ्वी पर रात 1:13 पर समाप्त हो जाएगी भद्रामुक्त होली दहन मुहूर्त रात्रि में 1:13 से है।
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ऐसे बनायें होलिका दहन स्थल :
जहां भी होलिका दहन करना हो सर्वप्रथम थोड़े गोबर और जल से स्थान को लीप कर पवित्र कर लें। एक अरण्ड वृक्ष की टहनी अथवा गूलर की टहनी जिसे पलाश अथवा उदुम्बर भी पुकारा जाता है। गाड़ कर डंडे के समान खड़ी कर दें। इसे भक्त प्रहलाद मान कर पूजन करें तथा गूलर के फूलों की माला पहनाएं तथा बालक प्रहलाद के लिए आस-पास खिलौनों के रूप में ढाल तलवार आदि मिट्टी कागज के खिलौने आदि रखें तथा जल, मावा नारियल आदि चढ़ायें। उसके बाद लकड़ी, कण्ड़ें, उपले लगा कर होली पूजन करने के बाद अग्नि लगाते ही उस अरण्ड की लकड़ी को भक्त प्रहलाद के रूप में सुरक्षित बाहर निकाल लें तथा महिलायें उस समय सात बार जल का अर्घ्य, रोली, चावल चढ़ाएं तथा होली (Holi 2022) के बधाई गीत गावें।
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क्या करें इस होली पर विशेष:- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा अर्थात होली की प्रातः अपने इष्ट देवता के साथ-साथ हनुमान एवं भैरों की पूजा जल, रोली, कलावा, चावल, फूल, गुलाल, चन्दन, नारियल व प्रसाद से करके आरती पश्चात सभी देवताओं को दण्डवत प्रणाम करें, फिर सबके होली तिलक लगावें फिर थोडे से तेल को घर से सभी बच्चों का हाथ लगाकर भैरों जी को अर्पित करे। गाय के गोबर की सुपारी के आकार की तेरह गोलियां बना कर माला बनाएं तथा बड़ों का आशीर्वाद लेकर घर में ही टांग देवें जिससे नकारात्मक प्रभाव के स्थन पर सकारात्मक प्रभाव बढ़े। सभी प्रकार के अच्छे भोजन, नमकीन, मिठाई बना कर थोड़ा-थोड़ा एक थाली में देवताओं के नाम निकाल कर ब्राह्मणों को अर्पित करें।

