गुजरात के मुखिया बन मनसुख मांडविया बन सकते हैं चुनावी नैया के खेवनहार

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गुजरात के मुखिया बन मनसुख मांडविया बन सकते हैं चुनावी नैया के खेवनहार

अहमदाबाद। मनसुख मांडविया वो शख्स हैं जिन्हें भारतीय जनता पार्टी हाईकमान गुजरात का मुखिया बनाकर चुनावी नैया का खेवनहार भी बना सकती है। असल में गुजरात के मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी के शनिवार को यकायक त्यागपत्र के बाद अब यह सवाल बड़ा है कि प्रदेश का अगला सीएम किसे बनाया जाएगा? इस बारे में सेंट्रल मिनिस्टर और बीजेपी के सीनियर पाटीदार लीडर पुरुषोत्तम रुपाला के मुताबिक, कल सुबह तक सीन क्लीयर हो जाएगी। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया गुजरात के अगले मुखिया हो सकते हैं। वैसे, डिप्टी सीएम नितिन पटेल, पूर्व गृहमंत्री गोरधन झडफिया और पुरुषोत्तम रुपाला के नाम भी चर्चा में हंै।

इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फे ंसिंग से अहमदाबाद में पाटीदार समाज की तरफ से बनवाए गए सरदारधाम भवन को इनॉगरेट किया। इस अवसर पर पीएम ने पाटीदार समाज की खूब प्रशंसा की। पीएम ने कहा कि पाटीदार समाज ने बिजनेस में देश को हमेशा एक नई पहचान दी। इस प्रोग्राम के बाद ही विजय रुपाणी अपना त्यागपत्र देने राज्यपाल के पास पहुंचे थे। ऐसे में यह साफ माना गया कि, गुजरात का अगला मुखिया कोई पाटीदार समाज से हो सकता है।

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गौर हो कि, गुजरात भाजपा के स्टेट प्रेसिंडेंट की पोजीशन संभालने ही सीआर पाटिल ने कहा था कि प्रधानमंत्री का सपना है कि आगामी चुनाव में बीजेपी को 150 से ज्यादा सीटें प्राप्त हो और गुजरात में भाजपा पार्टी एक नया रिकॉर्ड हासिल करे। साफ है इसके लिए बीजेपी को पाटीदार समाज को साथ लेने सख्त अवश्यकता होगी, क्योंकि ऐसी सूचना है कि, पाटीदार समाज भाजपा से नाराज है। इस चश्में से देखा जाय तो राजनीति कहती है कि, यहां किसी पाटीदार को मुखिया बनाकर पाटीदारों का समर्थन हासिल किया जा सकता है।

एक खास बात और- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया पीएम मोदी के अलावा अमित शाह की भी गुड बुक में हैं। ऐसे में उनके मुख्यमंत्री की दौड़ में आगे होने की संभावना बढ़ जाती है। मांडविया ने कोरोना महामारी के दौरान गुजरात में बीजेपी गवर्नमेंट की पोजीशन सुधारने के लिए काम किया। इतना ही नहीं, पाटीदार समाज के अलावा कडवा और लेउआ पटेल समुदाय में भी उनकी स्वीकारोक्ति है। वह न केवल मृदुभाषी हैं बल्कि उनकी छवि भी साफ-सुथरी मानी जाती रही है।

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