न्यू इंडिया की न्यू पॉलिसी से शुरू होगा ड्रोन-कल्चर का नया अध्याय

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न्यू इंडिया की न्यू पॉलिसी से शुरू होगा ड्रोन-कल्चर का नया अध्याय

नई दिल्ली। पाकिस्तानी ड्रोन हमलों और भारत की सुरक्षा में सेंधमारी की सतर्कता के बीच केन्द्र सरकार ने ड्रोन के लिए न्यू पॉलिसी लाकर अपनी प्रोगे्रसिव सोच का एक नया नमूना पेश किया है। ताजा प्रोग्रेसिव नियमावली से इंडिया में ड्रोन आपरेशन को लेकर हालात पहले के मुकाबले बिल्कुल बदल जाएंगे। ऐसे में बिजनेस को प्रोत्साहन देने के लिए न केवल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम प्रमोशन काउंसिल बनेगी बल्कि ड्रोन के आयात का रेगुलेशन डीजीएफटी करने लगेगा। कुलमिलाकर दुश्मन ड्रोनों की जहां पहचान आसान हो जाएगी वहीं भारत में ड्रोन आधारित व्यवसाय को बढ़ावा भी मिलेगा।

न्यू पॉलिसी के मुताबिक, ड्रोन के लिए अब नियम शिथिल हो जाएंगे। यूनीक ऑथराइजेशन नंबर मिलेगा इसपर यूनीक प्रोटोटाइप आइडेंटिफिकेशन नंबर भी होगा। यही नहीं, दूसरे इस्तेमाल के लिए प्रमाणपत्र होंगे। ड्रोन के उपकरणों के इम्पोर्ट के लिए इम्पोर्ट परमिशन लेनी पड़ेगी।

नयी ड्रोन पॉलिसी 2021 में अब ड्रोन का पेलोड 300 केजी से बढ़ाकर 500 केजी कर दिया गया है। यहां हैवी पेलोड ले जाने वाले ड्रोन ही नहीं ड्रोन टैक्सी भी शामिल होगीं । फार्म और परमिशन की संख्या 25 से घटा कर 5 कर दी गई है। इसका मतलब, परमिशन में अब पहले के मुकाबले कम टाइम लगेगा।

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ड्रोन के लाइसेंस के लिए सिक्योरिटी मंजूरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिकरण से पहले किसी तरह की सिक्योरिटी परमिशन की अवाश्यकता नहीं है। परमिशन के लिए फीस अब मामूली ही भरनी होगी।

फाइन मनी को भी घटा दिया गया है, अधिकतम फाइन मनी घटाकर एक लाख रुपये किया गया है, यह अन्य कानूनों के उल्लंघन की फाइन मनी से अलग होगा।

कलर भी एक खास पहचान होगी। असल में डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर इंटरएक्टिव एयरस्पेस मैप ग्रीन, येलो और रेड कलर में दिखाया जाएगा। एयरपोर्ट की सीमा में येलो एरिया को 45 किलोमीटर से घटाकर 8 से 12 किलोमीटर किया गया है।

ग्रीन एरिया में ड्रोन उड़ाने के लिए परमिशन की जरूरत नहीं होगी। साथ ही एयरपोर्ट के क्षेत्र में 8.12 किलोमीटर तक 200 फीट की ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाने के लिए परिमिशन नहीं चाहिए। ड्रोन के ट्रांसफर और डीरजिस्ट्रेशन की प्रॉसेस भी अब आसान हो जाएगी।

रही बात इसके रजिस्ट्रेशन की तो, ड्रोन का डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर ही ऑनलाइन पंजीकरण कर लिया जाएगा। नैनो ड्रोन, गैर बिजनेस इस्तेमाल के लिए या माइक्रो ड्रोन उड़ाने के लिए पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

इंडिया के मौजूदा ड्रोन के रेगुलेशन के लिए एक आसान मौका दिया जाएगा। कुछ सिक्योरिटी मेजर्स जैसे- एनपीएनटीए रियल टाइम ट्रैकिंग बीकन, जिओ फेंसिग वगैरह का फ्यूचर में नोटिफिकेशन किया जाना है। इसको फालों करने के लिए छह महीने का वक्त दिया जाएगा।

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ड्रोन रिलेटेड प्रमाणपत्र क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से ही जारी होगा। ड्रोन की सभी ट्रेनिंग और एक्जाम स्वीकृत ड्रोन स्कूल में होगी। इसके बारे में डीजीसीए सूचना देता रहेगा।

न्यू पॉलिसी के अनुसार, आरएंडडी के लिए टाइप सर्टिफिकेट, यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर, प्री-परमिशन और रिमोट पायलट लाइसेंस की जरूरत अब नहीं। कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर बनेंगे।

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