नई दिल्ली। इंटरनेशनल स्तर पर इस समय क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। इस कारण से इंडियन फ्यूल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियां पेट्रोल और रसोई गैस में लागत की भरपाई की स्थिति में पहुंच गई हैं। लेकिन कंपनियों को अभी डीजल बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले चार-पांच महीनों में क्रूड के अंतरराष्ट्रीय दामों में उठापटक का दौर जारी रहने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किए। एक दिन में पांच-सात डॉलर प्रति बैरल तक दाम घट-बढ़ रहे थे। इस तरह के उतार.चढ़ाव की स्थिति में अब कंपनियां देशवासियों पर किसी प्रकार का पर बोझ नहीं डाल रहे हैं।
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बीपीसीएल के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑयल, एचपीसीएल ने पिछले पांच महीने से पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम अधिक होने पर एक समय पेट्रोलियम कंपनियों को डीजल के दाम में प्रति लीटर 20-25 रुपये और पेट्रोल पर 14-18 रुपये नुकसान उठाना पड़ रहा था। लेकिन अब कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में गिरावट आने के बाद नुकसान काफी हद तक कम हो गया। कंपनियों ाक दावा है कि उनको अगले महीने से एलपीजी पर किसी तरह का घाटा नहीं होगा। इसी तरह पेट्रोल पर कोई नुकसान नहीं हो रहा है। इन सबके बीच आज पेट्रोल डीजल के दामों में किसी प्रकार का केाई बदलाव नहीं किया गया है। मेरठ सहित देश के सभी राज्यों में पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर हैं।

