अमित बिश्नोई
Exit Poll UP 2022: यूपी विधानसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया आज ख़त्म हो गयी और उसके ख़त्म होते ही इंतज़ार में बैठे टीवी चैनलों ने सभी पांचों राज्यों के एग्जिट पोल जारी कर दिए और हमेशा की तरह सबकी अपनी अपनी डफली और अपना अपना राग नज़र आया। जिसका तुक्का बैठ गया उसकी जय जय और जिसका नहीं बैठा उसकी भी जय और किसी का भी सही नहीं बैठा तब भी कोई चिंता नहीं।
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वैसे तो भक्ति का आरोप लगने वाले सभी चैनलों ने उन्हीं एजेंसियों से एग्जिट पोल (Exit Poll UP 2022) कराया जिन्होंने बंगाल में ममता के हारने और भाजपा के सरकार बनाने की भविष्यवाणी की थी। यह सभी चैनल यूपी में भाजपा की वापसी की बात कर रहे हैं, कुछ चैनल सिंपल मेजोरिटी दे रहे हैं तो कुछ वही पुरानी 300+ की बात कर रहे हैं। हालाँकि आत्मसाक्षी ग्रुप जैसी कुछ और एजेंसियों ने भी एग्जिट पोल किया है और जिसमें एकदम उलट तस्वीर नज़र आ रही है, उसे इन भक्त चैनलों और पोल ऑफ़ पोल्स करने वाले और अपने आपको भक्त चैनलों से अलग बताने वाले एक नामी चैनल ने अपने प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं दी है। अगर इसे भी पोल ऑफ़ पोल्स में शामिल कर लिया जाय तो संख्या एकदम बदल जायगी और मुकाबला लगभग बराबरी पर आ जायेगा।
बंगाल चुनाव में इन्हीं कंपनियों के द्वारा कराये गए सर्वेक्षणों का जो हश्र हुआ वह सबके सामने है। सबको मालूम है कि इन चैनलों के एग्जिट पोल ही नहीं ओपिनियन पोल्स में भी ममता के हारने का परसेप्शन खड़ा किया जाता रहा मगर जब नतीजे आये तो ममता शेरनी और यह सभी एजेंसियां और चैनल भीगी बिल्ली नज़र आईं। कमोबेश वैसा ही परसेप्शन यूपी में खड़ा करने की कोशिश हो रही है।
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यूपी के विधानसभा चुनाव 2022 (UP assembly election 2022)
यूपी के विधानसभा चुनाव (UP assembly election) में भी यह चैनल और उनकी एजेंसियां लगातार भाजपा के पक्ष में ही माहौल बनाती नज़र आयी. हालाँकि अभी चुनाव परिणाम नहीं आये हैं लेकिन 10 मार्च को होने वाली मतगणना से पूर्व यह एग्जिट पोल्स कुछ बिहार जैसी स्थिति होने का संकेत दे रहे हैं। सिर्फ पांच छह सीटों पर जहाँ विनिंग मार्जिन बेहद कम था रात के अँधेरे में खेल कर दिया गया था और तेजस्वी मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए. यूपी के चुनाव की अगर ज़मीनी सच्चाई को स्वीकार करें तो आमने सामने की इस टक्कर में यह तय है कि कम से कम 25- 30 सीटों पर मार्जिन सैकड़ों में या उससे भी कम हो सकता है और तब यूपी में बिहार को दोहराया जाय, इससे इंकार नहीं किया जा सकता, इसके होने की आशंकाएं पहले से ही जताई जा रही हैं। शायद इसीलिए पोस्टल बैलेट (Postal Ballet) की पहले गिनती की मांग विपक्ष कर रहा है। शायद इसीलिए किसान नेता राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया है कि किसान दो दिन अपने खेतों के बजाये मतगणना केंद्रों पर डेरा डालें ताकि कोई गड़बड़ी न हो पाए। शायद इसीलिए समाजवादी पार्टी ने हर ज़िले में मतगणना केंद्र पर वकीलों की उपस्थित को सुनिश्चित करने के लिए जिला अध्यक्षों को निर्देश जारी किये हैं। कहने का मतलब विपक्ष पूरी पेशबंदी किये हुए है, वह जनता है कि भाजपा इससे पूर्व जीत के लिए क्या क्या कर चुकी है और क्या क्या कर सकती है।
यह सभी मानते हैं कि भाजपा (BJP) के लिए यूपी का चुनाव जीतना कितना ज़रूरी है। 2024 में वापसी के लिए यूपी में भाजपा की सरकार रहना बेहद ज़रूरी है. अगर सरकार नहीं रहेगी तो मुश्किलें हर हाल में बढ़ेंगी। यूपी हारने पर भाजपा के लिए मोदी जी के लिए लोगों में एक नकारात्मक सन्देश जाएगा जिसकी पहली झलक कुछ दिनों बाद होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव में दिखेगी। आपको मालूम होना चाहिए कि यूपी के एक विधायक की वोटिंग वैल्यू अन्य राज्यों के विधायकों से बहुत ज़्यादा होती है और यह वैल्यू किसी भी सरकार को अपना राष्ट्रपति बनाने में बड़ी भूमिका अदा करती है।
लौटते हैं एग्जिट पोल की ओर. एक तरफ कहा जाता है कि सैफोलोजी एक साइंस है। अब साइंस है तो फॉमूले भी होंगे और उन्हीं फॉर्मूलों का उपयोग कर यह एजेंसियां मात्र कुछ हज़ार लोगों से तथाकथित रूप से राय पूछकर लाखों लोगों की राय का सटीक अनुमान लगाने का दावा करती हैं। अनुमान सही बैठ गया तो ब्रांड वैल्यू बढ़ गयी, फेल हो गया तो कोई जवाबदेही नहीं। इनसे कोई पूछने वाला नहीं कि भाई जब सैफोलोजी एक साइंस है तो हर एजेंसी की राय में इतनी भिन्नता क्यों? टीवी पर बहस करने वाले भी यह सवाल कभी नहीं पूछते।
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मेरे हिसाब से तो एग्जिट पोल मोरंजन का एक साधन और मतगणना से पहले लोगों के समय काटने का एक जरिया है। यह बात टीवी वाले और सर्वे करने वाले भी अच्छी तरह जानते हैं। इसीलिए वह एग्जिट पोल जैसे मनोरंजक एपिसोड आपके लिए लेकर आते हैं, आप भी इसे मनोरंजन की तरह लीजिये, बाक़ी सारी असलियत 10 मार्च को खुलकर सामने आ जाएगी।

