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एग्जिट पोल्स से पहले एग्जिट पोल, इतनी जल्दी क्या है?

आर्टिकल/इंटरव्यूएग्जिट पोल्स से पहले एग्जिट पोल, इतनी जल्दी क्या है?

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अमित बिश्नोई
देश में लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान आज चल रहा है, 57 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं, इसके बाद शाम को एग्जिट पोल आएंगे जो पहले से तैयार हो गए हैं, बस शाम को घोषणा होनी बाकी है. आप कहेंगें कि ऐसा कैसे? मतदान से पहले ही एग्जिट पोल कैसे? अभी कई राज्यों की सभी सीटों पर मतदान चल रहा है, फिर एग्जिट पोल कैसे तैयार हो गया. दरअसल ये मैं नहीं कह रहा बल्कि पुण्य प्रसून बाजपेयी कह रहे हैं. पुण्यप्रसून बाजपेयी जाने माने पत्रकार हैं, कई मशहूर टीवी चैनलों में जो आज गोदी मीडिया की श्रेणी में आते हैं काम कर चुके हैं और अब अपना खुद का यू ट्यूब चैनल चलाते हैं. बाजपेयी जी न कल अपने एक प्रोग्राम में बताया कि एक जून शाम को जो एग्जिट पोल आने वाला है उसके नतीजे उनके पास आ चुके है और उन नतीजों के मुताबिक केंद्र में मोदी सरकार वापस आ रही है. उन्होंने शाम को आने वाले एग्जिट पोल्स के आंकड़ों का विश्लेषण भी कर डाला। बस उन्होंने उन चैनलों के नाम नहीं बताये जिनके एग्जिट पोल्स आंकड़े उनके पास हैं, एकबार यही कहा कि ये सर्वे एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने किये हैं.

आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने एग्जिट पोल्स को तीन कैटेगरी में विभाजित कर दिया। एक कैटेगरी में भाजपा 300+, दूसरी में 276 से 296 और तीसरी में कम से कम 256 सीटें। और फिर इसके बाद उन्होंने राज्यवार क्या क्या चल रहा है इसके बारे में भी विस्तार से बताया। अब यहाँ पर पहला सवाल तो यही आता है कि मेनस्ट्रीम से अलग पत्रकार के पास मैनस्ट्रीम मीडिया द्वारा करवाए गए एग्जिट पोल्स के आंकड़े कैसे आ गए. दूसरा सवाल कि पुण्य प्रसून बाजपेयी ने उन्हें अपने प्रोग्राम में शामिल कैसे कर लिया जबकि चुनाव आयोग की सख्त हिदायत है कि एग्जिट पोल एक जून को शाम साढ़े 6 बजे से पहले जारी नहीं किये जा सकते। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भले ही सर्वे कमापनियों का नाम नहीं लिया, चैनलों का नाम लिए लेकिन बाकि सारी डिटेल उन्होंने विस्तार से बता दी , एक तरह से उन्होंने सभी एग्जिट पोल्स का औसत आंकड़ा लोगों के सामने रख दिया और बता दिया कि आएगा तो मोदी ही.

इसके बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जब हिमाचल प्रदेश और पंजाब की एक भी सीट पर मतदान नहीं हुआ है तो फिर कथित एग्जिट पोल्स में उसका विश्लेषण कैसे हुआ, कौन सी साइंस के फॉर्मूले से पता चल गया कि पंजाब और हिमाचल में किसको कितनी सीटें मिलनी वाली हैं. अभी 57 सीटों पर मतदान चल रहा है, 57 सीटें बहुत होती हैं, क्या पुण्य प्रसून बाजपेयी का ये प्रोग्राम अंतिम चरण के मतदान को प्रभावित करने की कोशिश है. बता दें कि पुण्य प्रसून बाजपेयी के चैनल के 4.22 मियां सब्सक्राइबर हैं, उन्हें लोग सुनते हैं तो मतदान से पहले एग्जिट पोल के नाम पर ये बता देना कि सरकार तो मोदी जी की ही बन रही है सरासर चुनाव अचार संहिता का उल्लंघन है. पुण्य प्रसून बाजपेई के इस प्रोग्राम के थंबनेल में लिखा है “कल क्या होगा एग्जिट पोल का आंकड़ा जान लीजिये।।। मेरे पास आ गया है टीवी चैनलों का फाइनल नंबर”. इतने बड़े सब्सक्राइबर वाले यू ट्यूब चैनल पर अगर एक बड़ा पत्रकार इस तरह के आंकड़े पेश करता है तो वोटरों का प्रभावित होना संभव है.

पुण्य प्रसून बाजपेयी की अगर ये बात सही है कि उनके पास एग्जिट पोल्स का फाइनल नंबर है तो फिर कहना पड़ेगा कि सैफोलोजी ने एक और मुकाम हासिल कर लिया है. उसे एग्जिट पोल्स कराने की भी कोई ज़रुरत नहीं, 57 सीटों पर मतदान से पहले ही उसका एग्जिट पोल बताना यकीनन इस विधा का चरम है. वैसे इस तरह के आंकड़े आने का विपक्ष को पहले ही अंदाजा था तभी तो अखिलेश यादव ने कल ही अपने कार्यकर्ताओं को चिट्ठी लिखकर आगाह कर दिया था कि भाजपा और गोदी मीडिया कल शाम से ये बात कहना शुरू कर देंगे कि भाजपा को 300 से ज़्यादा सीटें आ रही हैं। ऐसा करके वो एक नैरेटिव बनाएंगी कि सरकार भाजपा की ही बन रही है ताकि सपा कार्यकर्ताओं का हौसला टूटे और वो निराश होकर घर बैठ जांय और फिर भाजपा अधिकारीयों से मिली भगत करके नतीजों में हेरफेर करके नतीजे पलटने की कोशिश करे. इसलिए सतर्क रहने की ज़रुरत है, मतगणना के दिन सावधान रहने की ज़रुरत है. एग्जिट पोल्स के झांसे में आकर निराश होने की ज़रुरत नहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी एग्जिट पोल्स से निपटने की तैयार कर ली है और उससे दूर रहने की बात कही है.

सवाल ये नहीं कि सरकार कौन बनाएगा, भाजपा सरकार फिर बनती है तो किसी को कोई हैरानी नहीं होगी लेकिन देश में जो माहौल नज़र आ रहा है वो तो यही दिखा रहा है कि मुकाबला तगड़ा है. सवाल यही है कि एग्जिट पोल आने से पहले ही पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अंतिम चरण के मतदान से पहले उन कथित पोल्स को लीक क्यों किया, इसके पीछे उनकी मंशा के है. क्या ब्रेकिंग न्यूज़ की दौड़ है, क्या चैनल को और ज़्यादा व्यूज और सब्सक्राइब कराने की होड़ है या फिर कुछ और. जवाब 4 जून को मिल जायेगा लेकिन इतना तो पक्का ही हो गया कि चुनाव आचार संहिता की ऐसी तैसी करने वालों में वो लोग भी शामिल हो गए जो अपने प्रोग्रामों में इसपर खूब हो हल्ला मचाते थे, किसी ने सही कहा कि इस हम्माम में सब नंगे हैं

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