- आंकड़ों में बाजीगरी कर लीपापोती करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
- पहली बार सरकारी आंकड़े में सबसे ज्यादा मौत बुधवार को दर्ज
अमित बिश्नोई
मेरठ। कोरोना संक्रमण के बेकाबू हालातों पर स्वास्थ्य विभाग लीपापोती करने में जुटा है, बावजूद इसके स्थितियां और बिगड़ती जा रही हैं। संक्रमण के बढ़ते केसेस पर शासन की नाराजगी झेल रहे विभाग ने अब जांच की संख्या कम कर दी है, बावजूद इसके संक्रमित मरीजों के मिलने का आंकड़ा कम नहीं हो रहा हैं।
ये हैं आंकड़ों के समीकरण
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों ओर गौर करें तो पिछले कुछ दिनों में जांच का दायरा 6 से साढ़े हजार सैंपल टेस्टिंग पर पहुंच गया है। जबकि इससे पूर्व विभाग हर दिन 8 से 10 हजार सैंपल टेस्टिंग करवा रहा था। बीते चार दिन यानी 9 मई से 12 मई की रिपोर्ट देखे तो इसके मुताबिक कुल 24606 सैंपल जांच हुए हैं। जिसमें कुल 6052 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। आंकड़ों से साफ है कि टेस्टिंग कम होने के बावजूद चार दिन में कुल सैम्पल जांच के लगभग 25 प्रतिशत सैंपल संक्रमित पाए गए हैं।
आंकड़ों का गणित
12 मई- 6,401- 1199
11 मई- 6,622- 1298
10 मई- 4656- 2190
09मई- 6,927- 1365
कुल जांच–24606–कुल पॉजिटिव- 6052
हर चौथा व्यक्ति संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते चार दिन की सैंपल टेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक हर चौथे व्यक्ति में कोरोना पॉजिटिव मिल रहा है। जबकि विभाग ने आंकड़ों को कम दिखाने के लिए सैंपल टेस्टिंग कम कर दी हैं। हालात ये हैं कि गांव-गांव में वायरस दस्तक दे चुका है। विभाग के ही आंकड़ों के अनुसार करीब 1 हजार लोग संक्रमित मिल चुके हैं जबकि इससे 10 गुना ज्यादा लोगों में कोरोना जैसे लक्षण सामने आए हैं।
बुधवार को सबसे ज्यादा मौत
मेरठ में कोरोना से होने वाली मौतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सरकारी आंकड़े कुछ भी कहें लेकिन शमशान घाट में हर रोज़ जलने वाली दर्जनों चिताएं जमीनी हकीकत बयां करने के लिए काफी हैं। हालांकि बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में पहली बार कोरोना संकरण से होने वाली सबसे ज्यादा 16 मौतों की पुष्टि की गई

