अमित बिश्नोई
भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम को आने वाले समय मे कोच के लिए विदेशी ख़िलाडोयों की ओर नही देखना पड़ेगा. फॉर्मर भारतीय खिलाड़ी राहुल द्रविड़ इस पद पर आसीन हो सकते हैं. हालांकि बीसीसीआई पहले भी द्रविड़ को टीम का कोच बनाने की पहल कर चुका है लेकिन खुद द्रविड़ ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस जिम्मेदारी से इनकार कर दिया था. गौरतलब है कि द्रविड़ को बीसीसीआई ने जूनियर क्रिकेट की जिम्मेदारी सौंप रखी है जिसे उन्होंने बेहतर ढंग से निभाया है. उनके इसी काम को देखते हुए बीसीसीआई उन्हें नेशनल टीम की जिम्मेदारी देना चाहता है.
खुद की पहल
बीसीसीआई से जुड़े सूत्रों की माने तो द्रविड़ ने अब खुद इस जिम्मेदारी के लिए बीसीसीआई को बोला है. हालांकि अभी द्रविड़ को कोच बनाना सम्भव नही है क्योंकि बोर्ड पहले ही रवि शास्त्री को ये जिम्मेदारी दे चुका है. शास्त्री के साथ बोर्ड ने 3 साल का करार किया है, ऐसे में अभी द्रविड़ को 2 साल इंतज़ार करना पड़ेगा.
पूरा हुआ मिशन
सूत्रों की माने तो द्रविड़ ने हाल ही में एक इवेंट के दौरान खुद कहा कि अगर बोर्ड आगे उन्हें रिक्वेस्ट करेगा तो वो इस विषय पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा कि पहले जब बोर्ड की ओर से प्रपोजल आया तब वह जूनियर क्रिकेट में काफी व्यस्त थे और जो मिशन शुरू किया था उसे बीच मे नहीं छोड़ सकते थे. हालांकि उन्होंने माना कि अब उनका मिशन पूरा हो चुका है और इन्होंने युवा खिलाड़ियों की लंबी फौज खड़ी कर दी है जो भविष्य में देश को रिप्रेजेंट कर सकती है. ऐसे में वह अब आगे देखना चाहते हैं और सीनियर ट्राम को सेवा देने चाहते हैं.
बन सकते हैं पहली पसंद
अगर द्रविड़ कोच बनना चाहेंगे तो वह बोर्ड की पहली पसंद बन सकते हैं. बीसीसीआई चेयरमैन सौरव गांगुली तो काफी अर्से से द्रविड़ को जानते हैं और द्रविड़ उनकी कप्तानी में टीम का अहम हिस्सा रहे हैं. वहीं बोर्ड की क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के सदस्य सचिन तेंदुलकर आउट वीवीएस लक्ष्मण भी द्रविड़ के साथ खेल चुके हैं और उनके प्रशंशक रहे हैं. ऐसे में बोर्ड के स्तर पर द्रविड़ का रास्ता क्लियर नजर आ रहा है.
कोहली हैं रोड़ा
द्रविड़ की राह में अगर कोई रोड़ा बन सकता है तो वो हैं भारतीय कप्तान विराट कोहली. रवि शास्त्री को कोच बनाने में उनका अहम योगदान रहा है, जबकि मतभेद के बाद अनिल कुंबले जैसे स्टार कोच को भी इस्तीफा देना पड़ा था. दरअसल जो परम्परा रही है उसके मुताबिक कोच चुनते वक्त कप्तान की राय भी ली जाती है. पिछले मामलों को देखते हुए ऐसा माना जाने लगा है कि कोहली टीम में अन्य किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहते. ऐसे में कुंबले की तरह द्रविड़ के साथ उनका ईगो टकरा सकता है.

