Exclusive: अस्ल जिंदगी की ‘शेरनियां’ सिनेमाई परदे पर भी दहाड़ती हैं

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Exclusive: अस्ल जिंदगी की ‘शेरनियां’ सिनेमाई परदे पर भी दहाड़ती हैं

Zeba Hasan

कहते हैं कमाठीपुरा में कभी अमावस की रात नहीं होती, गंगूबाई चांद है और चांद ही रहेगी….यह डायलॉग हैं फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी का। एक सेक्स वर्कर गंगूबाई (Gangubai) की जिंदगी पर बनी यह फिल्म साल 2022 की पहली ब्लाकबस्टर साबित हो चुकी है। हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुम्बई’ पर आधारित, गुजरात की रहने वाली 16 साल की एक लड़की गंगा हरजीवनदास कैसे गंगूबाई बनती है? यह कहानी जब सिनेमाई पर्दे पर आई तो बॉक्स ऑफिस के साथ लोगों के दिलों को भी हिट कर गई। सिर्फ गंगूबाई ही नहीं भारतीय इतिहास के पन्नों से निकल कर कई महिलाओं की कहानियों ने सिनामाई करिश्मा दिखाया है। यह वह महिलाएं हैं जिन्होंने दायरों को लांघ कर एक नई इबारत को लिखा है। फिर वह चाहे रेड लाइट ऐरिया में रहने वाली गंगूबाई हो या फिर खेल के मैदान को रण करने वाली बॉक्सिंग चैपियन मैरी कॉम। अंतर्राराष्ट्रीय महिला दिवस आने वाला है इस मौके पर कुछ ऐसी ही फिल्मों का जिक्र हम कर रहे हैं।

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आलिया के रूप में हिट हो गई गंगूबाई

गुजरात की रहने वाली सीधी सी एक लड़की अपने प्रेमी के साथ भाग कर मुम्बई आती है। फिल्मों में काम करने की चाहत में वह इतना बड़ा कदम उठाती है लेकिन महज 500 रुपए में उसका प्रेमी ही उसे बेच देता है। एक प्रेमिका से वेश्या तक का सफर। इस सफर में अपने जैसे लड़कियों के हक की बात करना। चुनाव जीतकर अपने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देना। हर किसी के लिए आसान नहीं था। लेकिन गंगूबाई (Gangubai) ने यह साबित कर दिया कि बेवाई के बाद जिस्म को बेचने वाली औरत इतनी भी कमजोर नहीं होती। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में आलिया भट्ट ने इस किरदार को बेहतरीन अंदाज में जीकर गंगूबाई को लोगों के जेहनों में हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।

आज भी उमरावजान हिट है

सिनेमाई पर्दे पर महिलाओं का बोलबाला आज से नहीं बल्कि बहुत पुराना है। हर दौर में महिला प्रधान फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस से लेकर लोगों के जेहनों को भी रोशन किया है। इस कड़ी में सन 1980 में आई फिल्म उमरावजान (Movie Umraojaan) का नाम भी शामिल है। फैजाबाद और लखनऊ से ताल्लुक रखने वाली तवायफ उमराव की जिंदगी पर बनी यह फिल्म कल्ट फिल्मों में शुमार की जाती है। मुजफ्फर अली का निर्देशन और रेखा की अदायगी को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।

विरोध के बीच जबरदस्त कमाई

चित्तौड़ की राजपूत रानी पद्मिनी लेकर बनाई गई फिल्म पद्मावत (Movie Padmaavat) साल 2018 की ब्लॉकबस्टर फिल्म है। एक रानी एक क्रूर शासक को जौहर करके किस तरह से मात देती है यह अपने आप में एक मिसाल है। संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी इस फिल्म का काफी विरोध हुआ लेकिन बावजूद इसके फिल्म ने जबरदस्त कमाई की। रानी पद्मावत के किरदार में दीपिका पादुकोण को काफी सराहा गया। यह फिल्म उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई।

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बॉक्सिंग रिंग में लिखा जिंदगी का नया फलसफा

छह बार विश्व मुक्केबाजी में चैम्पियन मणिपुर की मैरीकॉम के संघर्ष और उपलब्धियों पर आधारित फिल्म मैरीकॉम (Film Mary Kom) ने साल 2014 में बॉक्स ऑफिस पर डंका बजाया था। अपने बजट से तीन गुना कमाई करने वाली यह फिल्म धमाकेदार हिट साबित हुई थी। बचपन से एक गुस्से वाली लड़की बॉक्सर बनना चाहती है। यह चाहत उसे वर्ल्ड चैम्पियन बॉक्सर तक ले जाती है जो उसके कोच बनते है। ट्रेनिंग लेकर गोल्ड मेडल जीतने के बाद शादी, दो बच्चे होने के बाद वह किस तरह से चैम्पियन बनती है। बॉक्सिंग रिंग में एक औरत के औरत के संघर्ष को दर्शकों के साथ बॉक्स ऑफिस ने भी सिर आंखों पर बिठाया।

डर्टी पिक्चर का हिट गेम

दक्षिण भारतीय फिल्मों की नायिका सिल्क स्मिता की जिदंगी पर बनी फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ (Film ‘Dirty Picture’) 2011 की हिट फिल्म है। 80 के दशक की एक सी ग्रेड हीरोइन खुद को किस तरह से फिल्मी दुनिया में पहचान दिलाने में कामयाब होती है। संघर्ष, सफलात और विफलता के बीच उलझी कहानी एक औरत के अलग ही रूप को दर्शाती है। विद्या बालन अभिनीत इस फिल्म ने सफलता की नई कहानी को लिखा है।

समाजिक सरोकार के साथ कारोबार भी

इनके अलावा उत्तर प्रदेश की सम्पत पाल के गुलाबी गैंग से प्रेरित माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म गुलाब गैंग (Movie gulab gang) , 2016 में एक एयर होस्टेस जिसने प्लेन में अपनी जान की बाजी लगाकर सैकड़ों यात्रियों की जान बचाई या फिर भारतीय वायुसेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना की जिंदगी पर बनी फिल्म द कारगिल गर्ल जैसी कई और फिल्में भी हैं। नायिका प्रधान यह फिल्में इस ओर भी संकेंत देती है कि हिंदी फिल्मों में महिला पात्रों का चित्रण यथार्थपरक तरीके से किया जाए तो वह समाज पर असर भी डालेंगी और बिजनेस भी अच्छा करेंगी।

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