EVM पर इंडिया ब्लॉक में बढ़ती अनबन

आर्टिकल/इंटरव्यूEVM पर इंडिया ब्लॉक में बढ़ती अनबन

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अमित बिश्नोई
पहले हुए मध्य प्रदेश विधानसभा के नतीजों के बाद पिछले महीनों हुए हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव नतीजों के बाद EVM का मुद्दा एकबार फिर ज़ोरशोर से उठा है विशेषकर इंडिया गठबंधन की मुख्य पार्टी कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर पहले से ज़्यादा मुखर होकर EVM की बात की जा रही है. प्रियंका गाँधी जब संसद में अपना पहला वक्तव्य दे रही थीं तब ट्रेज़री बेंच ने किसी बात पर उन्हें टोका जिसके जवाब में प्रियंका ने स्पष्ट तौर पर कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव करवा लीजिये, दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा। मतलब संसद में, जहाँ कही गयी हर बात एक दस्तावेज़ बन जाती है (अगर उसे कार्रवाई से पीठ निकाल न दे तो) वहां पर सीधे तौर इस मुद्दे को उठाना ये जताता है कि EVM के मामले पर कांग्रेस पार्टी इसबार काफी गंभीर है और इसे हर प्लेटफॉर्म पर उठा रही है लेकिन पिछले दो दिनों से इंडिया गठबंधन की दो सहयोगी पार्टियों ने न सिर्फ EVM का समर्थन किया है बल्कि कांग्रेस पार्टी को नसीहत भी दी है. ये दो सहयोगी पार्टियां हैं जम्मू कश्मीर की नेशनल कांफ्रेंस और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस। दोनों ने कांग्रेस पार्टी से कहा है कि EVM पर दोषरोपण बंद करे.

नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह कहते हैं कि कांग्रेस को EVM पर रोना बंद करना चाहिए और अपनी हार को स्वीकार करना चाहिए वहीँ TMC की तरफ से कांग्रेस पार्टी से सबूत मांगे जा रहे हैं. TMC के अभिषेक बनर्जी का कहना है कि कांग्रेस के पास अगर कोई सबूत है तो फिर उसे चुनाव आयोग के सामने पेश करना चाहिए। बनर्जी कांग्रेस को सलाह देते हैं कि अगर आप मॉकपोल और काउंटिंग के टाइम पर प्रक्रिया को चेक करेंगे तो उन्हें नहीं लगता है कि कांग्रेस के इस आरोप में कोई दम है. देखा जाय तो इंडिया गठबंधन की दोनों सहयोगी पार्टियों की भाषा भाजपा वाली ही है, भाजपा भी यही कहती है कि अगर सबूत हो तो लाओ वरना EVM का रोना बंद करो. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमरअब्दुल्ला भी भाजपा की तरह कहते हैं कि ऐसा नहीं हो सकता कि जब आप जीतें तो EVM सही है और जब हारें तब EVM खराब है. तार्किक रूप से ये बात बिलकुल सही है। आप अपनी सुविधा के मुताबिक EVM के पक्ष और विपक्ष की बात नहीं कर सकते। यहाँ पर समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव का रुख काफी स्पष्ट है। वो कई बार सार्वजानिक मंचों पर EVM की बात कहते आ रहे हैं , उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश के सभी 80 लोकसभा सीटें जीत जांय तब भी वो EVM की बात कहेंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि चुनावी प्रक्रिया से EVM को हटाया जाय. यानि समाजवादी पार्टी EVM के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के साथ खड़ी नज़र आ रही है हालाँकि मध्य प्रदेश हो, हरियाणा या फिर महाराष्ट्र, समाजवादी पार्टी का इन राज्यों से राजनीतिक लेन देन ज़्यादा नहीं है.

जहाँ तक नेशनल कांफ्रेंस और तृणमूल कांग्रेस की बात है तो दोनों राज्यों में इन दलों की सरकारें हैं. जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस को भले ही कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिला हुआ है लेकिन साथ चुनाव लड़ने के बावजूद वहां पर कांग्रेस पार्टी ने सरकार से बाहर रहना ज़्यादा पसंद किया। ये भी कहा जा सकता है कि सरकार चलाने के लिए कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस की मजबूरी नहीं है, कांग्रेस के अलग रहने पर भी उसे सरकार चलाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल जायेगा. दूसरे EVM जैसे मुद्दे पर वो केंद्र से टकराव लेना पसंद नहीं करेगी। वैसे भी जम्मू कश्मीर की पार्टियों के लिए EVM कभी मुद्दा नहीं रहा. जहाँ तक ममता बनर्जी या फिर TMC की बात है तो चूँकि बंगाल पर फिलहाल उनका पूरा प्रभाव है इसलिए EVM ममता और TMC के लिए एक गैर ज़रूरी मुद्दा है। वैसे भी इनदिनों इंडिया ब्लॉक् में एक नया सिनेरियो पैदा करने के प्रयास चल रहे हैं जिसकी शुरुआत ममता बनर्जी द्वारा दिए गए एक बयान से हुई जिसमें उन्होंने इंडिया ब्लॉक् के मौजूदा नेतृत्व को एक तरह से अक्षम बताते हुए खुद नेतृत्व करने की बात कही थी, उनके बयान के बाद कई और सहयोगी दलों के बयान उनके समर्थन में आये थे जिसमें समाजवादी पार्टी, शरद पवार की पार्टी और राजद मुख्य पार्टियां थीं. EVM पर कांग्रेस को घेरने वाले और सबूत मांगने वाले अभिषेक बनर्जी के इस बयान को भी इसी परिपेक्ष्य में देखा जा रहा है.

भाजपा के बाद EVM पर कांग्रेस पार्टी से सबूत मांगने वाली TMC दूसरी राजनीतिक पार्टी है, वैसे बांग्लादेश में हिन्दुओं के उत्पीड़न पर TMC और भाजपा एक मंच पर दिख रहे हैं, भाजपा को हर समय घेरने वाली ममता पिछले कुछ समय से कुछ शांत हैं, भाजपा के खिलाफ वो उतना मुखर नहीं दिख रहीं हैं जितना वो अक्सर नज़र आती थीं. हालाँकि अभिषेक बनर्जी के बयान पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि अगर सबूत दिए जा सकते तो अबतक इंतज़ार नहीं होता। कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि EVM पर सबूत देना संभव नहीं है, इसीलिए हम सिर्फ EVM की विसंगतियों के बारे में बात कर रहे हैं. कांग्रेस सांसद का कहना है कि अभिषेक बनर्जी ऐसा इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि वह पश्चिम बंगाल में सत्ता में हैं, लेकिन जब पश्चिम बंगाल की बात आएगी तो उन्हें उम्मीद है कि अभिषेक बनर्जी इस मुद्दे को कांग्रेस से ज़्यादा तेज़ उठाएंगे. फिलहाल तो EVM के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को इंडिया ब्लॉक् में ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हालाँकि EVM पर कांग्रेस पार्टी को महायुति के अलावा समाजवादी पार्टी का भी समर्थन हासिल है. देखने वाली बात ये है कि EVM के बहाने कांग्रेस पार्टी को घेरने के पीछे उमर अब्दुल्ला और ममता बनर्जी का क्या मकसद है क्योंकि इस समय EVM पर खुलकर भाजपा के साथ खड़े होना और कांग्रेस का विरोध करना लोगों की समझ में नहीं आ रहा. कुछ भी हो नेशनल कांफ्रेंस और TMC के इस कांग्रेस विरोध से चुनाव आयोग ज़रूर खुश होगा जिसकी विश्वसनीयता सचमुच में खतरे में पड़ती हुई नज़र आ रही है, बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका मुख्य चुनाव आयुक्त कभी उत्तर नहीं देते।

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