सुनील शर्मा
लो जी लो कर लो बात, बाबाजी ने तो दावा कर दिया कि सबको वैक्सीन लगाऊंगा, एक-एक को चुन-चुन के लगवाऊंगा। बच्चा, बूढा या हो जवान, किसी को बिना वैक्सीन के रहने नहीं दूंगा। अब बाबा जी ने कह दिया तो मानना तो पड़ेगा ही, मगर चंचल मन है सवाल करने से बाज नहीं आता और सवाल भी कोई नाजायज नहीं है, बस बाबाजी का जवाब क्या, कब और किस तरह से मिलेगा, इस बात का डर सताता है। ये ना हो कि सवाल पूछें बाबाजी से और जवाब दे खाकी वाले। काले कोट वाले भी पर्चा लेकर चले आ सकते हैं। फिर कोट-कचहरी, थाना-पुलिस…. आप तो सब जानते ही हैं।
वैसे तो बाबाजी का कहा सत्य वचन, मगर सबको लगवाने के लिए वैक्सीन आएगी कहां से। अभी तो जिनको लगाने का वादा किया है उनके लिए ही पूरी नहीं हो रही हैं वैक्सीन। टीकाकरण के लिए पोर्टल खोलो तो स्लाॅट पलक झपकते ही पूरा बुक हो जाता है। दूसरी डोज लगवाने के लिए वैक्सीनेशन सेंटर पहुचने वालो को वापस लौटा देते हैं। लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं मगर वैक्सिन है नहीं। कहीं पर सेंटर बंद हो रहे हैं तो कहीं पर सेंटर खोले जा रहे हैं। लेकिन जब वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ही यह कह रही है की वैक्सीन बनने से ज्यादा तो सरकार लगवाना कहती है तो फिर वैक्सीन लगेगी कहां से।
खैर बाबा जाने अपने मन की बात हम तो बस इतना जानते हैं उतना ही वादा करना ठीक है जितना निभाया जा सके। कोरोना की तीसरी लहर से पहले सबको वैक्सीन लगवाने के दावा करने वैसा ही है कि घर में नहीं दाने और अम्मा चली भुनाने। तो बाबाजी अब सत्ता के आखिरी साल में तो ऐसा आश्वासन ना दीजिए जिसे पूरा ना कर पाए। कहीं पब्लिक ने आप को वोट देने का वादा पूरा ना किया तो परेशानी आपको ही होगी।
हम तो बाबा जी आप के सच्चे भक्त हैं, आपसे निवेदन ही कर सकते हैं। बाकी आप अंतर्यामी हैं हो सकता है कि आप कोई जादू की छड़ी घुमाये और वैक्सीन की गंगा बहने लगे। मगर बाबाजी ऐसा कर सकते होते तो खुद के साथ साहेब की सारी परेशानियों को दूर न कर लेते। न विदेशों से मांगनी पड़ती, न वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए बाहर से कंपनी को बुलाना पड़ता। तो बाबाजी चुनावी बेला में भटकने से जगहँसाई के अलावा कुछ नही मिलता और जनता से पूरे न होने वाले वायदे करने से वोट नहीं मिलता।

