एल्विश यादव जबसे ‘बिग बॉस ओटीटी 2‘ में गए है तब से ही उन्होंने वहा तहलका मचा रखा है. शुरुआत तो उनकी सबसे अलग थी ही लेकिन समय के साथ उनमें एक अलग ही स्वभाव देखने को मिला है. वह बेहद शांत और चीजों का अवलोकन करते नजर आ रहे हैं. आज कल उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे वो अभिषेक मल्हान और मनीषा रानी का गेम प्लान बताते नजर आ रहे है. वहीं, मनीषा रानी मुस्कुराते हुए कह रही हैं- नहीं, ऐसा नहीं है.
अगर आप लोग अभी तक एल्विश यादव एक बारे में नही जानते है तो हम आपको बता दे कि एल्विश यादव एक जानेमाने यूट्यूबर हैं, और उनकी फैन फॉलोइंग भी काफी तगड़ी है. जब उनके और अभिषेक मल्हान के बीच की बात और जनता के योगदान की बात आती है, तो एल्विश हमेशा जीतता है। वहीं अभिषेक अपनी हार से दुखी हो जाते हैं. लेकिन वे कभी भी बोलकर इसका जिक्र नहीं करते. ये उनके चेहरे से दिख रहा है. पूजा भट्ट भी करती हैं लेकिन ये दोनों ज्यादा करती हैं। शायद ये सोच कर कि लोग उसे अच्छा समझते हैं.
एल्विश यादव ने किया एक्सपोज
एल्विश यादव भी कुछ ऐसा ही कहते सुने गए. एल्विश यादव और मनीषा रानी एक्टिविटी एरिया के पास बैठकर बातें कर रहे थे। फिर एल्विश ने अपने दोनों को-कंटेस्टेंट्स के गेम का पर्दाफाश कर दिया. उन्होंने कहा, ‘मैंने एक बात बहुत ध्यान से देखी है. जब से मैं इस घर में आया हूँ तुम श्याने नहीं हो। तुम बुद्धिमान बनो. आप इस बात से कैसे शर्मा जाते हैं कि अगला व्यक्ति बेवकूफ है और आपको यह बात समझ में आ गई है. हमें क्या दिखाना है और क्या नहीं दिखाना है.
मनीषा रानी की चतुराई
एल्विश यादव आगर कहते है ,अब तो हालात ही ऐसे बन गए है कि सब बेवकूफ ही दिख रहे है तो आप लोग अपने आप ही अच्छे दिखने लगे हो । आपका मुख्य फोकस इस बात पर है कि किसी भी बातचीत में हम बाहर से बुरे न दिखें। और आपकी समझ ये है कि आपको ये बात समझ में आ गई है. तुम्हारी चतुराई यह है कि तुम यह काम करते हो। तुम्हारी मूर्खता यह है कि तुम वह बात अपने मुँह से कहते हो।
मनीषा रानी बेवकूफी भरी बातें करती है
मनीषा रानी एल्विश पूछती हैं कि हम आखिर मुंह से क्या कहते हैं? तो एल्विश कहते हैं, ‘ओह, वह यही बाहर देखेगा, ओह, हम यह कर रहे हैं, तो यह हमारी महानता है। मुझे ऐसा लगता है कि यहां के लोगों में वास्तविक जीवन में उतना बड़प्पन नहीं है, जितना वे यहां दिखाते हैं। कुल मिलाकर यूट्यूबर ने मनीषा रानी के खेल का पर्दाफाश कर दिया है.

