जाट लैंड और रूहेलखंड पार अब यादवलैड और बुदेलखंड के लिए छिड़ी जंग

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जाट लैंड और रूहेलखंड पार अब यादवलैड और बुदेलखंड के लिए छिड़ी जंग

मेरठ। Election News in Hindi – प्रदेश के विधानसभा का दो चरण पूरा हो चुका है। जिसमें जाट लैड और रूहेलखंड में मतदान हो चुका है। अब तीसरा चरण का मतदान यादवलैड और बुदेंलखंड में होने जा रहा है। जिसको लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। मौसम में जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है उसी तरीके से चुनाव प्रचार में तीखी गरमी बढ़ने लगी है। विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में 16 जिलों की 59 सीटों के लिए मतदान 20 फरवरी को होगा। इसमें बुदेलखंड और अवध की जंग दलों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाली है। बता दें कि पहले चरण में पश्चिमी उप्र की 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान हुआ था। जिसमें जाट बाहुल्य विधानसभाएं शामिल थी। दूसरे चरण में भी पश्चिमी उप्र का कुछ हिस्सा और रूहेलखंड के 9 जिलों की 55 सीटों पर मतदान 14 फरवरी को हुआ था। दूसरा चरण मुसिलम और दलित मतदाता बाहुल्य था। अब तीसरे चरण के लिए घमासान छिड़ा हुआ है। जिसके लिए आगामी 20 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। इन 16 जिलों की 59 सीटों पर आगामी 18 फरवरी को चुनाव प्रचार थम जाएगा।

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तीसरे चरण का चुनाव तीन हिस्सों में बंटा :

तीसरे चरण का चुनाव प्रदेश के तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। जिसमें एक हिस्सा पश्चिमी यूपी और रुहेलखंड के अलावा अवध के कुछ विधानसभा भी शामिल होंगी। पश्चिमी यूपी के जिलों की बात करें तो इन जिलों में मैनपुरी, फिरोजाबाद, कासगंज एटा और हाथरस सम्मलित हैं। वहीं इस चरण में बुंदेलखंड के जिले हमीरपुर, झांसी,ललितपुर,जालौन और महोबा की विधानसभाएं शामिल हैं। इसी के साथ अवध क्षेत्र की बात करें तो इसमें कन्नौज,इटावा,कानपुर,कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद जैसे जिले हैं।

2017 में भाजपा ने इन 59 सीटों में से 49 विधानसभा पर कब्जा किया था। यहां पर भाजपा के सामने 2017 का इतिहास दोहराने की चुनौती है। 2017 में सपा को मात्र 8,कांग्रेस को 1 और बसपा को भी एक सीट मिली थी। 2017 में सपा और कांग्रेस का गठबंधन था।

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59 में से 30 पर यादव वोट बैंक सालिड :

तीसरे चरण के विधानसभा चुनाव में 30 सीटों पर यादव वोटों की बहुलता है। इसलिए इसकेा यादवलैंड भी कहा जाता है। 16 जिलों में से 9 जिलों में यादव वोट काफी निर्णायक हैं। 2017 में इन 59 सीटों पर यादव वोटों के खिलाफ दूसरे समाज की वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। जिसका लाभ भाजपा को मिला था। इसी कारण अपने ही गढ़ में सपा बुरी तरह से हारी थी। इस बार अखिलेश यादव वोटों को एकजुट करने के साथ अन्य दूसरी बिरादियों के वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव ने इस बार करहल से चुनाव लडऩे का फैसला लिया। जिससे कि यादव वोटों के साथ दूसरे वोट भी सपा के पाले में आए।

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