नई दिल्ली। चीनी मोबाइल कंपनी वीवो ने भारत में धोखेबाजी से अपना व्यापार शुरू किया। एक ही आईएमईआई नंबर के वीवो कंपनी ने हजारों मोबाइल बनाकर भारतीय बाजार में उतार दिए। वीवो कंपनी की ये कारस्तारी मेरठ में खुली तो मोबाइल बाजार में हड़कंप मच गया। मेरठ पुलिस ने पहली बार इसकी जांच की तो कंपनी ने अधिकारियों से मिलीभगत कर इसमें पूरी लीपापोती कर मामला बंद करवा दिया। लेकिन प्रकरण को आईजी मेरठ और एडीजी मेरठ द्वारा संज्ञान में लिया गया और इसकी जांच के आदेश फिर से दिए गए। जिसके बाद से अब मामले की कई परते फिर से खुलने लगी है। चीनी मोबाइल कंपनी वीवो पर कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जिसके चलते चीन की मोबाइल फोन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी वीवो अब मुसीबतों में फंसती नजर आ रही है।
जांच में ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के मामले में वीवो के ठिकानों पर छापेमारी को भी संज्ञान लिया गया है। वीवो कंपनी पर कसते कानूनी शिकंजे के कारण अब इसके डायरेक्टर भारत छोड़ भाग गए हैं। जांच रिपोर्ट में वीवो के दो डायरेक्टर झेंगशेन ओउ और झांग जी के भारत छोड़ने का भी जिक्र किया गया है।
बता दें कि गत 7 जुलाई 2022 को ईडी ने वीवो मोबाइल कंपनी के 44 ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी की इस छापेमारी में काफी अनियमितता मिली थी। वहीं कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई थी। वीवो चीनी मोबाइल कंपनी इस समय वीवो मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के मामले में इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के रडार पर है। बताते चलें कि इस मामले में ईडी के साथ सीबीआई पहले से जांच कर रही है। ईडी ने वीवो के खिलाफ प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। मेरठ में अब वीवो कंपनी के लगे बोर्ड भी उतारे जाने लगे हैं।

