आज के आगरा संस्करण के एक हिंदी अखबार की खबर के अनुसार आगरा में 10 अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण भर्ती सारे मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया. अमर उजाला की खबर में कहा गया कि आगरा में निजी अस्पतालों में 35 टन ऑक्सीजन की प्रतिदिन खपत होती है जबकि इस समय 10 टन की ही आपूर्ति हो रही है. नामनेर स्थित एसआर अस्पताल के गेट पर अस्पताल प्रबंधन ने ‘नो ऑक्सीजन नो बेड’ का नोटिस लगा दिया है. सरकार का दावा है कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है जबकि सच्चाई सरकार के दावे के विपरीत है. न्यू आगरा स्थित यशवंत हॉस्पिटल में महज 1 घंटे का ऑक्सीजन बैकअप बचा हुआ है. उस अस्पताल में 50 सिलेंडर की जरूरत थी लेकिन बमुश्किल 5 सिलेंडर ही मिल सके. प्रतापपुरा स्थित सफायर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म हो गई. आगरा में रामबाग मंगलम हॉस्पिटल गोयल सिटी कबीर देव अस्पताल, सिकंदरा स्थित प्रभा अस्पताल सब में ऑक्सीजन की कमी बरकरार है. 34 निजी कोविड अस्पताल में 3340 मरीज भर्ती है. लेकिन इनके लिए ऑक्सीजन को लेकर कल दिन भर हाहाकार मचा रहा. इन परिस्थितियों में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने तत्काल बैठक बुलाई है. वास्तव में यह संकट आज ही नहीं पैदा हुआ बल्कि 5 दिनों से बरकरार है. निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन न मिलने के कारण ढेर सारे जीवन रक्षक उपकरण जैसे वेंटिलेटर, एचएनएफसी, वाइपर मशीनें आदि काम नहीं कर पा रही हैं. आगरा की ही कल यह तस्वीर आई थी की एक महिला ऑक्सीजन ना होने के कारण अपने पति को मुंह से ऑक्सीजन दे रही थी लेकिन वह अपनी भागीरथ कोशिश के बावजूद अपने पति को नहीं बचा पाई.
सरकारी दावे जो भी हो सच्चाई यही है की आगरा में हालत बहुत खराब है. इतना ही नहीं आगरा में मरीजों को मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी लंबी वेटिंग का इंतजार करना पड़ रहा है विद्युत शवदाह गृह में 20 घंटे तक चिमनिया धुंआ उगल रही हैं. एंबुलेंस के अभाव में कार की छत पर लोग लाश लेकर श्मशान घाट ताजगंज पहुंच रहे हैं. अमर उजाला की आज की खबर के अनुसार सांस लेने में दिक्कत होने पर भर्ती के लिए मरीज दर-दर भटक रहे. कहीं अस्पताल में बेड नहीं है और कहीं ऑक्सीजन की कमी अस्पतालों द्वारा बताई जा रही है. जिला अस्पताल आगरा में लंबा इंतजार भर्ती के लिए करना पड़ रहा है. सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद करने से अन्य रोगों के मरीज भटक रहे हैं और बेमौत मर रहे हैं.
इसलिए आज जरूरत है कि सरकार को जो संविधान में जीने के अधिकार के तहत स्वास्थ्य की गारंटी मौलिक अधिकार है को लागू कराने हेतु बाध्य करने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की. जो कोरोना महामारी जैसे हालात से निपटने के लिए हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा की हर हाल में गारंटी करें, आक्सीजन जैसे न्यूनतम जरूरतों को पूरा करे और आम आदमी के लिए हर तरह के इलाज की मुफ्त व्यवस्था करने की गारंटी करें. इसके लिए एक जन राजनीति को खड़ा करना वक्त की जरूरत है जिसे सबको मिलकर पूरा करना होगा.
इंजीनियर दुर्गा प्रसाद
प्रभारी कोविड हेल्प डेस्क आगरा एवं
महासचिव, ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट.

