पीएम का ज़िंदा लौटना

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पीएम का ज़िंदा लौटना

अमित बिश्‍नोई

भारत जैसे महान देश में आज एक प्रधानमन्त्री खुद कह रहा है कि वह एक ऐसे राज्य जहाँ उसकी पार्टी की सरकार नहीं है “ज़िंदा वापस” आया है. सच में यह बड़ी चिंता की बात है. प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक पिछले 70 सालों (प्रचलित नारा) में कई बार हुई होंगी लेकिन कभी इतनी गंभीर चूक नहीं हुई होगी कि एक प्रधानमंत्री को अधिकारियों से आधिकारिक रूप से कहना पड़ा हो कि वह ज़िंदा वापस लौटा है, वह भी अपने देश के ही एक राज्य में।

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पहले बात प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक पर. आप सभी जान ही चुके होंगे कि प्रधानमंत्री बुधवार को पंजाब के फ़िरोज़पुर में एक सरकारी कार्यक्रम और एक चुनावी रैली को सम्बोधित करने पहुंचे थे, मौसम बहुत ख़राब था, भटिंडा से हेलीकाप्टर द्वारा फ़िरोज़पुर जाना था, नहीं जा सके. बाद में सड़क मार्ग से जाने का कार्यक्रम बना. फ़िरोज़पुर में हुसैनीवाला के राष्ट्रीय शहीद मेमोरियल से 30 किलोमीटर पहले पीएम मोदी का काफिला फ्लाईओवर पर पहुंचा, जहाँ पता चला कि किसानों ने सड़क को घेर रखा है, प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर ही रुक जाता है. 15-20 मिनट बाद यू टर्न लेकर प्रधानमंत्री का काफिला भटिंडा लौट जाता है जहाँ एयरपोर्ट अधिकारियों से वह एक जुमला कहते हैं कि अपने सीएम को धन्यवाद कहना कि मैं एयरपोर्ट तक ज़िंदा लौट सका।

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तो जनाब जहाँ तक प्रधानमंत्री की सुरक्षा की बात है तो सभी जानते हैं कि एसपीजी ही मुख्य तौर पर ज़िम्मेदार होती है, हालाँकि बाक़ी एजेंसियां भी सुरक्षा का एक अहम् हिस्सा होती हैं, राज्य का पुलिस प्रशासन तो एक सपोर्टिव हिस्सा होती है. बिना एसपीजी की इजाज़त के प्रधानमंत्री के किसी भी दौरे पर कोई भी किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। एसपीजी गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए आप ऐसा भी कह सकते प्रधानमंत्री की सुरक्षा की असल ज़िम्मेदारी होम मिनिस्ट्री की उसकी होती है, दूसरे शब्दों इसे गृह मंत्री अमित शाह की भी ज़िम्मेदारी कह सकते हैं . एसपीजी कैसे कार्य करती है यह एक लम्बा विषय है लेकिन मोटा मोटी आप जान लें कि पीएम की सुरक्षा में हुई किसी भी तरह की चूक से वह अपने को अलग नहीं कर सकती, वजह चाहे कोई भी हो।

चूंकि देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होने वाले हैं जिनमें से एक पंजाब भी है तो लाज़मी है कि इस विवाद पर राजनीति का रंग चढ़ना ज़रूरी है. राजनीति शुरू भी हो गयी है, भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चूका है, मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा दिया गया है. जज साहिबान फौरी सुनवाई को भी तैयार हो गए हैं. भाजपा जहाँ कांग्रेस पर खूनी साज़िश का इल्ज़ाम लगा रही है तो कांग्रेस इसे चुनावी स्टंट कह रही है, क्योंकि फ़िरोज़पुर में रैली स्थल पर लोगों की संख्या बेहद कम थी, मौसम ख़राब था, लगभग सारी कुर्सियां खाली थीं. कांग्रेस के मुताबिक फ़ज़ीहत से बचने के लिए प्रधानमंत्री ने यह ड्रामा रचा. पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी भी सुरक्षा में चूक की बात से साफ़ इंकार कर रहे हैं, उनका मतलब है कि राज्य सरकार इस सुरक्षा चूक की बिलकुल भी ज़िम्मेदार नहीं है, इधर गृह मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी भी बना दी है जिसमें सचिव सुरक्षा, संयुक्त निदेशक आईबी औरआईजी एसपीजी शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि पीएम की सुरक्षा के ज़िम्मेदार भी यह तीनों विभाग होते हैं।

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खैर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक हुई है, जो नहीं होनी चाहिए। ज़िम्मेदार कौन है यह जांच का विषय है, निष्पक्ष जांच होगी तो असली ज़िम्मेदार भी सामने आ जायेगा। लेकिन पब्लिक डोमेन में जो बातें सामने आयी हैं उनसे सवाल तो बहुत खड़े होते हैं, जो खड़े हो भी रहे हैं, टीवी मीडिया हो या सोशल प्लेटफॉर्म, बड़े तर्कपूर्ण और वाजिब सवाल लोग उठा रहे हैं लेकिन मेरे मन में जो सवाल उठ रहा है वह प्रधानमंत्री के “जान बचाने” वाले बयान से है. क्या किसी देश के प्रधानमंत्री को इस तरह की बात कहनी चाहिए कि वह अपने देश के ही किसी भूभाग से जान बचाकर आया है. क्या हमारे देश में इस तरह के हालात पैदा हो गए हैं कि देश के प्रधानमंत्री को जान का खतरा पैदा हो गया है वह भी उस प्रधानमंत्री के लिए जो विश्वगुरु बनने की राह पर है, जिसका दुनिया लोहा मानती है. क्या देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में है? प्रधानमंत्री के इस बयान से उन देशों में क्या सन्देश जायेगा जो भारत को एक बड़ी ताकत और नरेंद्र मोदी को एक मज़बूत वैश्विक लीडर मानने लगे हैं. मोदी जी हो सकता है आपको पंजाब में 20 मिनट सड़क पर जाम में फंसने पर भले ही अपनी जान का खतरा महसूस हुआ हो लेकिन देश के सबसे बड़े नेता के रूप में आपके मुंह से इस तरह का बयान आपको कमज़ोर साबित करता है. देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और देश के प्रधानमंत्री के रूप में आपका बयान सवाल बनकर आप तक ही पहुंचता है।

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