निगम के खेल में उलझे 2215 मेरठ नगर निगम के संविदा सफाई कर्मचारी

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निगम के खेल में उलझे 2215 मेरठ नगर निगम के संविदा सफाई कर्मचारी

कर्मचारियों को गैर कानूनी तरीके से आउससोर्सिंग दिखाने का आरोप

मेरठ। नगर निगम के 2215 संविदा सफाई कर्मचारी पिछले पांच वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं। संविदा सफाई कर्मचारी संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक सुरेंद्र कुमार ढींगिया ने बताया कि मेरठ नगर निगम समस्त अस्थायी 2215 सफाई कर्मचारियों को गैर कानूनी ढ़ंग से आउटसोर्सिंग में दिखा रहा है।

जबकि समस्त सफाई कर्मचारी नगर निगम और सदन के सीधे भर्ती किये गए कर्मचारी हैं। लम्बी सेवा पूरी करने के आधार पर काफी समय से वे नियमत होने के हकदार हैं।

उन्होंने बताया कि साल 1989 में पहली बार स्थाई सफाई कर्मचारी बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हुए थे। उस समय नगर निगम मेरठ के प्रथम महापौर अरुण कुमार जैन एवम् उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ शाखा ने नगर निगम मेरठ से मांग की कि जो सफाई कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं, उनके रिक्त पदों पर कार्य कराए जाने के लिए एवजीदार लगाकर कार्य कराया जाए।

सफाई कार्य कि महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए महापौर श्री अरूण कुमार जैन की अध्यक्षता में समझौता हुआ कि सफाई कर्मचारियों के सेवा निर्वित होने पर सफाई कार्य प्रभावित न हो। इसके लिये बेरोजगार सफाई कर्मचारियों की एवजदारी के पद पर भर्ती की गई।

लेकिन नगर निगम ने दिनांक 29 अप्रैल 2015 के बाद सफाई कर्मचारियों को उनकी सेवाएं समाप्त करते हुए अलकनंदा नामक फर्म को ठेका दे दिया गया। इसके लिये न तो सेवा समाप्त किए जाने की सूचना और न ही अलकनंदा नामक फ्रम को ठेका दिए जाने की सूचना सफाई कर्मचारियों को दी गई।

2015 में अलकनंदा को जब ठेका छोड़ा गया तो अलकनंदा फर्म ने भविष्यनिधी फंड एवम् मेडिकल सुविधा दिए जाने के नाम पर कटौती की। लेकिन अचानक साल 2017 में अलकनंदा फर्म का ठेका बन्द कर दिया गया। 80 प्रतिशत सफाई कर्मचारियों को न तो पीएफ की धन राशि का भुगतान किया गया और न ही मेडिकल इलाज का लाभ सफाई कर्मचारियों को मिल पाया।

आज राधा कृष्ण एवम कार्तिकेय नामक ,दो फर्मों पर ठेका होने के बाद सफाई कर्मचारियों को मेडिकल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि 2215 संविदा सफाई संघर्ष समिति ठेका समाप्त किए जाने की मांग करती है। ठेका समाप्त कर सविदा बहाल की जाए तथा प्रदेश के अन्य निकायों के भाँति 2215 सफाई कर्मचारियों को भी वही वेतन भुगतान किया जाए जो अन्य स्थानीय निकायों में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 2215 सफाई कर्मचारियों में तीन कैटेगरी है। इसमें पांच वेतन भोगी कर्मचारी, 1210 एवजीदार सफाई कर्मचारी व 1000 कर्मचारी बोर्ड द्वारा रखे गए हैं। सुरेन्द्र कुमार ढींगिया ने मांग की कि 2215 सफाई कर्मचारियों में जो पांच वेतन भोगी कर्मचारी हैं, उनका समायोजन किया जाये।

1210 एवजीदार सफाई कर्मचारियों की स्थाई नियुक्ति की जाए, शेष 1000 कर्मचारी जो बोर्ड के द्वारा रखे गए हैं, उनके वेतनमान में भी प्रदेश के अन्य निकायों की तरह वृद्धि की जाए। इस अवसर पर राजू ढीगिया महामंत्री व मोनू वैद उपाध्यक्ष मौजूद रहे।

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