Uttarakhand CM: इन कारणों से पूरी नहीं हो पा रही थी नए मुख्यमंत्री की तलाश, आखिरकर खुल गया सस्पेंस

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Uttarakhand CM: इन कारणों से पूरी नहीं हो पा रही थी नए मुख्यमंत्री की तलाश, आखिरकर खुल गया सस्पेंस

देहरादून। पिछले दस दिनों से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री (Uttarakhand CM) की तलाश में लगा था। लेकिन उसकी तलाश पूरी नहीं हो पा रही थी। बता दें कि गत 10 मार्च को प्रदेश के चुनावी नतीजे आए। जिसमें भाजपा (BJP) ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलावा गोवा और मणिपुर में शानदार जीत दर्ज करते हुए सरकार बनाने का बहुमत पाया। उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तय ​हो गए। लेकिन उत्तराखंड में दस दिन तक मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस रहा। जिसे आज पार्टी विधायक मंडल दल की बैठक में तय कर दिया गया। राजनैतिक गलियारों में सवाल तैर रहा है आखिर सीएम चेहरे को लेकर इतनी देरी क्यों। सच यह है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार ये चाहता था कि जो भी मुख्यमंत्री उत्तराखंड में बने वो पूरा पांच साल पूरा करे। इसलिए ही गृहमंत्री अमित शाह, अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पूरी तरह से गहन मंत्रणा कर पुष्कर सिंह धामी के नाम पर मोहर लगाई।

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कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अलावा प्रदेशाध्यक्ष को दो बार दिल्ली बुलाया गया। रविवार को भी कोर कमेटी की बैठक अमित शाह ने ली। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ0 रमेश पोखरियाल और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शामिल हुए।

भाजपा चयन में नहीं चाहती थी जल्दबाजी
भाजपा सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रिमंडल गठन में जल्दबाजी नहीं चाहता था। भाजपा राज्य में पहले ही पूर्व कार्यकाल में तीन-तीन मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले से असहज थी। इसलिए ऐसे हाथों में राज्य की कमान सौंपना की चुनौती थी जो कि पूरे पांच साल तक पद पर बना रहे और राज्य को बेहतर तरीके से चलाए।

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राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) चुनाव हार गए। इसके बाद मुख्यमंत्री के चयन में पेंच फंस गया। प्रदेश में भाजपा ने धामी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था। जिसकी बदौलत ही भाजपा 47 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत हासिल कर पाई थी।

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