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आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल के डा.मोहसिन खान ने कहा, फिजियोथैरेपी से कर सकते हैं कोरोना से बचाव

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आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल के डा.मोहसिन खान ने कहा, फिजियोथैरेपी से कर सकते हैं कोरोना से बचाव

डेढ़ गुना अधिक तेजी से स्वस्थ हुए आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल में भर्ती कोरोना मरीज

मेरठ। आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल में भर्ती कोरोना मरीज डेढ़ गुना अधिक तेजी से स्वस्थ हुए हैं। क्योंकि इन संक्रमितों को दवाएं देने के साथ नियमित रूप से फिजियोथैरेपी भी करायी गयी। शारीरिक क्षमता को विकसित करने के लिये अनुभवी फिजियोथैरेपिस्ट द्वारा कराई गयी एक्सरसाईज से मरीज कोरोना संक्रमण का मुकाबला करने मे सक्षम हुए। कोरोना संक्रमितों के उपचार में फिजियोथैरेपी बेहद मददगार साबित हुई और मरीज जल्द स्वस्थ होकर अपने घर जा सके।

कोरोना से संक्रमित मरीज के फेफड़े इंफेक्शन से प्रभावित हो जाते हैं। एलोपैथी दवाएं देने के बावजूद फेफड़ों में जमे बलगम को शरीर से बाहर निकाल पाना कई बार संभव नहीं होता। आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल में फिजियोथैरेपी के माध्यम से मरीज को चेस्ट फिजियोथैरेपी, ब्रीथिंग एक्सरसाईज, स्पाइरोमीटरी, पोस्चरल ड्रेनेज आदि फेफड़ों की एक्सरसाईज कराई जाती है। इन एक्सरसाईज से मरीज के फेफड़ों में बलगम एक स्थान पर एकत्रित हो जाता है जिसके बाद उसे सक्शन कर बाहर निकाल लिया जाता है। इससे मरीज को बेहद जल्द राहत मिलती है। कोरोना संक्रमित को सांस लेने में परेशानी होने पर उसकी पोजिशन चेंज कराये जाने और वाइब्रेशन, परसक्शन से भी मरीज को आराम मिलता है।

आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल के अनुभवी फिजियोथैरेपिस्ट डा.मोहसिन खान ने बताया कि कई कोरोना संक्रमित मरीज वेंटिलेटर पर होने या शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण एक्सरसाईज करने में सक्षम नहीं होते। लेकिन ऐसे मरीजों को भी बेड पर लेटे-लेटे एक्सरसाईज करायी जाती है। मरीजों के रिकवर होते जाने के साथ उनको वाॅकिंग और ग्रुप एक्सरसाईज भी करायी जाती है। फिजियोथैरेपी करने के तुरंत बाद मरीजों का ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट काफी बेहतर हो जाता है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीजों को नियमित रूप से एक्सरसाईज करने को कहा जाता है। समय-समय पर मरीजों से संपर्क कर उनके स्वास्थ की जानकारी भी ली जाती है। आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल में भर्ती मरीजों के मानसिक स्वास्थ का भी ध्यान रखा गया। स्टाॅफ द्वारा दिये गये पारिवारिक माहौल ने मरीजो को मानसिक रूप से सबल बनाया। इससे गंभीर स्थिति में हाॅस्पिटल में भर्ती किये गये मरीज भी जल्द स्वस्थ हो सके।

अनेक मरीज ऐसे होते हैं जो वृद्ध होने या दूर होने के कारण हाॅस्पिटल नहीं आ पाते। ऐसे मरीजों के लिये आईआईएमटी लाइफ लाइन हाॅस्पिटल द्वारा आॅनलाइन कोविड पल्मोनरी रिहेबलेशन ओपीडी शुरू की गयी है। डा. मोहसिन खान के मोबाइल नंबर 7500490960 पर वीडियो काॅल कर लोग एक्साईज करने के तरीके, उनके लाभ, एक्सरसाईज करने का उपयुक्त समय आदि के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।

कोरोना की तीसरी लहर से सर्तक रहना आवश्यक
डा.मोहसिन खान का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रभाव भले ही समाप्त होता जा रहा हो लेकिन हमें कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिये तैयार रहना आवश्यक है। क्योंकि कोरोना फेफड़ों पर दुष्प्रभाव डालता है इसलिये फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिये नियमित तौर पर एक्सरसाईज करना, ताजी हवा में दौड़ना या टहलना बेहद जरूरी है। ब्रीथिंग एक्सरसाईज, योगा के माध्यम से फेफड़े आंतरिक रूप से स्वस्थ हो जाते हैं। लेकिन एक्सरसाईज या योगा करने से पहले फिजियोथैरेपिस्ट की सलाह अवश्य लें ताकि आपके शरीर पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव न पड़े। कोविड संक्रमण से उबरे, किसी भी रोग से पीड़ित या शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति का फिजियोथैरेपिस्ट से परामर्श किये बिना एक्सरसाईज या योगा करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत बनायें ताकि आप कोरोना ही नहीं, अन्य रोगों का भी मुकाबला करने में सक्षम हो सकें।

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