जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: 10 प्रतिशत यादवों पर भारी पड़े 7 प्रतिशत क्षत्रिय

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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: 10 प्रतिशत यादवों पर भारी पड़े 7 प्रतिशत क्षत्रिय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में संपन्न हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 75 में से 67 जिलों में बीजेपी ने कमल खिलायाहै. इन चुनावों के परनामों का अगर जातिगत विश्लेषण करें तो पता चलता है कि सबसे ज्यादा 16 सीटों पर कामयाबी क्षत्रिय समाज को मिली है जिनमें 15 भाजपा के टिकट पर जीते हैं. वहीं, सपा की पांचों जिला पंचायत सीटों पर यादव समुदाय के नेताओं को ही जीत मिली है. इस तरह से यह कहा जा सकता है योगी की बीजेपी में क्षत्रियों का दबदबा तो अखिलेश की सपा में यादवों का वर्चस्व रहा है.

जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर 25 अगड़ी जाति के लोग चुनकर आए हैं. जिनमें 15 क्षत्रिय, 6 ब्राह्मण कैंडिडेट, दो भूमिहार और दो वैश्य समुदाय से जिला पंचायत अध्यक्ष बने हैं. एक दिलचस्प बात यह है कि क्षत्रिय समाज से आने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्राह्मणों की बनिस्बत ठाकुरों को दो गुनी से ज़्यादा सीटों पर कामयाबी दिलाने में कामयाबी हासिल की, हालाँकि आबादी में ब्राह्मण ज़्यादा हैं .

क्षत्रिय समुदाय के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 9 कैंडिडेट यादव समुदाय से जीतकर आए हैं, जिनमें चार बीजेपी से और पांच समाजवादी पार्टी से जीते हैं. गौरतलब है कि इसबार सपा के सिर्फ पांच ही उम्मीदवार जीते हैं, तो एक तरह से कहा सकते हैं कि सपा पर यादवों की पार्टी का ठप्पा काफी हद तक सही है.

यूपी में करीब 10 फीसदी यादव मतदाता हैं जबकि क्षत्रिय मतदाता लगभग 7 फीसदी हैं. इसके बाद भी क्षत्रिय 16 जिला पंचायत अध्यक्ष बने हैं. इसे सीएम योगी जी का कारनामा ही कहा जा सकता है.

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