Digital Transaction: सौ गुना बढ़ा डिजिटल लेनदेन, कैश की धाक आज भी बरकरार

नेशनलDigital Transaction: सौ गुना बढ़ा डिजिटल लेनदेन, कैश की धाक आज भी...

Date:

Digital Transaction: देश में डिजिटल लेनदेन करीब 100 फीसद तक बढ़ गया है। लेकिन डिजिटल लेनदेन की तरक्की के बीच कैश की धाक आज भी बरकरार है। यानी देश में कैश में रुपए का लेनदेन पूरी तरह से चलन में बना हुआ है।

केंद्र सरकार की तरफ से जारी किए आंकड़ों के अनुसार डिजिटल लेनदेन की संख्या में पिछले नौ साल में 100 गुना बढ़ी है। वित्त वर्ष 2013-14 में मात्र 127 करोड रुपए का डिजिटल लेनदेन हुआ था। वहीं 2022—23 में डिजिटल लेनदेन का ये आंकड़ा बढ़कर 12,735 करोड़ पर पहुंच गया है। एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 में जहां कुल डिजिटल पेमेंट नॉमिनल जीडीपी (मुद्रास्फीति छोडकर) का 668 प्रतिशत था, वह 2022—23 वित्त वर्ष में बढकर 767 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

देश की भुगतान प्रणाली (पेमेंट सिस्टम) में नकदी का हिस्सा 2015-16 वित्तवर्ष में 88 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष में 2021-22 में 20 प्रतिशत पर आ गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्तवर्ष 2026-27 में यह 11.15 प्रतिशत पर पहुंच जाएगा। डिजिटल लेनदेन की हिस्सेदारी 2015-16 में 11.26 प्रतिशत से लगातार बढ़कर 2021-22 में 80.4 प्रतिशत तक पहुंची है। 2026-27 में इसके 88 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है। जारी आंकड़ों के अनुसार digital transaction में नौ साल में 100 गुना वृद्धि हुई है।

2 हजार के नोट बंदी के बाद डिजिटल लेनदेन ने पकड़ा जोर

सरकार ने 2 हजार रुपए के नोट को चलन से बाहर करने का फैसला किया है। उसके बाद से डिजिटल लेनदेन, करेंसी इन सर्कुलेशन, डिजिटल इकॉनमी और ब्लैक मनी वगैरह को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। लोग चाहते हैं कि आखिर सरकार के इस कदम का मकसद क्या है।
2016 की नोटबंदी के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। खासकर डिजिटल लेनदेन के मामले में। डिजिटल लेनदेन की बढ़ती प्रवृत्ति से नकदी चलन में कमी आई हो ऐसा हालांकि अभी नहीं दिख रहा है।

आंकड़े की माने तो नकदी लेनदेन यानी नकदी के चलन में लगातार इजाफा हो रहा है। आरबीआई से प्राप्त डेटा के मुताबिक 23 दिसंबर 2022 तक भारत में नकदी का चलन 32.42 लाख करोड़ रुपए था। जबकि नोटबंदी से ठीक पहले यानी 4 नवंबर 2016 को 17.74 लाख करोड़ रुपए नकदी लेनदेन हुआ था। उस समय से कैश के चलन में 83 प्रतिशत से अधिक की बढोतरी हुई है।

वार्षिक आधार पर देखें तो 2022—23 वित्त वर्ष के दौरान नकदी के चलन में 7.9 प्रतिशत की तेजी आई है। 2021-22, 2020-21, 2019-20, 2018-19 और वित्त वर्ष 2017-18 में नकदी लेनदेन कमश: 9.8 प्रतिशत, 16.6 प्रतिशत, 14.5 प्रतिशत, 16.8 प्रतिशत और 37 प्रतिशत रही है। जबकि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान इसमें 19.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी साल नोटबंदी की घोषणा हुई थी। इसके चलते नकदी के लेनदेन में कमी आई थी। जानकारों की माने तो कोरोना महामारी के दौरान लोगों में नकदी रखने की प्रवृत्ति बढी है। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के पूरी तरह हटा लिए जाने के बाद नकली चलन को बढावा मिला।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related