चमोली- देवभूमि उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा में आपने भगवान श्री बद्री विशाल के दर्शन तो किए ही होंगे. आज हम आपको उत्तराखंड में स्थित सात बद्री (जिन्हें सप्त बद्री भी कहा जाता है) मैं से एक ध्यान बद्री के बारे में बताते हैं ध्यान बद्री को महाभारत काल जोड़ा जाता है. बताया जाता है कि ध्यान बदरी में पांडव वंशज के राजा ने उसका निर्माण कराया था काले पत्थर से बनी भगवान विष्णु की मूर्ति अपने आप में अद्भुत है. इस मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति ध्यान रूप में स्थापित है. जिसके चलते इस जगह को जान बद्री कहा गया है.
धार्मिक मान्यताएं
चमोली जिले के उद्गम घाटी में स्थित ध्यान बद्री समुद्र तल से करीब 7005 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. कल्प गंगा नदी के तट पर स्थित ध्यान बद्री को लेकर धार्मिक मान्यताओं में इसे महाभारत काल से जोड़ा जाता है. मान्यताओं के अनुसार पांडव वंश के राजा पुरंजय के पुत्र उर्वशी जिन्होंने उर्गम क्षेत्र में भगवान विष्णु के मंदिर की स्थापना की. मंदिर में भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली काले पत्थर से बनी मूर्ति ध्यान मुद्रा में है. बद्रीनाथ की यात्रा जाते समय आप इस मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. मंदिर के पास ही आपको भगवान शिव का बड़ा कल्पेश्वर मंदिर भी दिखाई देगा.
सप्त बद्री
अभी तक आप खंड में केवल बद्रीनाथ के बारे में ही शायद जानते होंगे. लेकिन उत्तराखंड में एक नहीं सात बद्री स्थापित हैं. जिन्हें सप्त बद्री के नाम से भी जाना जाता है.
सप्त बद्री में बद्रीनाथ जी का मंदिर प्रमुख मंदिर है जो चमोली में बद्री का आश्रम में स्थित है.
आदिबद्री- जिसे प्राप्त सबसे प्राचीन स्थान भी कहा जाता है चमोली के करणप्रयाग में स्थित है .
वृद्ध बद्री – वह स्थान है जो चमोली के जोशीमठ के पास स्थित है.
भविष्य बद्री- कहते हैं कि बद्रीनाथ के विलुप्त होने के बाद यही वह तीर्थ स्थान होगा जहां पर भगवान श्री विष्णु की पूजा होगी.
योग ध्यान बद्री- यह स्थान चमोली जिले के पांडुकेश्वर में स्थित है.
ध्यान बद्री – यह स्थान और गम घाटी मैं मौजूद है.
नरसिंह बद्री- यह स्थान चमोली के जोशीमठ में स्थित है.
