Hindu Calendar: हिंदू धर्म का सातवां महीना अश्विन मास प्रारंभ, धान्य दान करने से होती है अन्न तथा धन की वृद्धि

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अश्विन मास को हिन्दू धर्म का सप्तम महीना माना गया है। अश्विन नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम अश्विन पड़ा  है। आश्विन मास का संबंध अश्विनौ से है। ये सूर्य के पुत्र हैं और देवताओं के चिकित्सक हैं। इस मास का एक नाम क्वार है। अश्विन का आरम्भ हो चुका है। जबकि गुजरात एवं महाराष्ट्र में अभी भाद्रपद मास चल रहा है। महाभारत अनुशासन पर्व अध्याय 106 के अनुसार “तथैवाश्वयुजं मासमेकभक्तेन यः क्षिपेत्। प्रज्ञावान्वाहनाढ्यश्च बहुपुत्रश्च जायते।।” जो अश्विन महीने में सिर्फ एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकार के वाहनों से सम्पन्न तथा अनेक पुत्रों से युक्त होते है। आश्विने भौमावास्याम जायते खलु पार्वती। विविध विपदाम धनक्षयं पापाचारम वर्धते।। महाभारत के अनुसार जो अश्विन मास में ब्राह्माणों को घृत दान करता है, उस पर दैव वैद्य अश्विनीकुमार प्रसन्न होकर उसे सुंदर रूप प्रदान करते हैं। शिवपुराण के मुताबिक अश्विन में धान्य दान करने से अन्न,धन की वृद्धि होती है।

अग्निपुराण के मुताबिक अश्विन महीने में गोरस-गाय घी, दूध और दही तथा अन्न देनेवाला सब रोगों से छुटकारा पा जाता है। अश्विन महीने के कृष्णपक्ष की षष्ठी के दिन मंगलवार, रोहिणी नक्षत्र और व्यतिपात हो तो वह अनंत पुण्य देने वाला कपिला षष्टी योग कहलाता है। यह योग बहुत दुर्लभ होता है। शिवपुराण के मुताबिक सती ने अश्विन मास में नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी) तिथियों में भक्तिपूर्वक गुड़, भात और नमक चढाकर भगवान शिव का पूजन किया। उन्हें नमस्कार करके उसी नियम के साथ उस मास को व्यतीत किया। अश्विन कृष्णपक्ष को पितृपक्ष महालय के नाम से जानते हैं। जिसमें पितृ ऋण से मुक्त होने तथा पितरों को तृप्त करने के उद्देश्य से श्राद्ध करते है।

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