हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रंभा तृतीया व्रत का आयोजन होता है, जहाँ इस दिन कुँवारी कन्याएँ मनचाहा वर पाने के लिये व्रत रखती हैं, साथ ही इस दिन विधि-विधान से पूजा करती हैं। बता दें कि इस दिन सुहागिन महिलाएँ भी अपने पति की लंबी आयु और बुद्धिमान संतान की प्राप्ति आदि के लिये आज के दिन यह व्रत रखती हैं, जहाँ वह सोलह श्रृंगार करके व्रत का पारण करती हैं।
वहीं मान्यताओं के अनुसार सौभाग्य प्राप्ति के लिये आज के दिन ही अप्सरा रंभा ने इस व्रत को किया था, इस वजह से इसे रंभा तृतीया नाम दिया गया है।
यह है शुभ मुहूर्त-
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 01 जून बुधवार में रात 09 बजकर 47 मिनट से हो रही है, साथ ही इस तिथि का समापन 03 जून शुक्रवार की रात 12 बजकर 17 मिनट पर होगा।
ये है रंभा तृतीया पूजा विधि-
इस दिन सबसे पहले उठकर स्नान आदि करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक स्वच्छ आसन पर भगवान शिव और माता पार्वती को स्थापित करें। अब गणेश जी की पूजा करके पूजा अर्चना की शुरुआत करें, इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा शुरू करें। वहीं पूजा में हल्दी, मेहंदी, लाल फूल, अक्षत और अन्य पूजा की सामग्री चढ़ायें।

