मेरठ में दो साल पहले महिला पर फेंका गया था तेजाब
एसिड अटैक मामलों में मेरठ न्यायालय ने दिया बड़ा निर्णय
कोर्ट का फैसला बाकी मामलों में बनेगा नजीर, पीड़िताओं को मिलेगा न्याय
मेरठ। उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में दो साल पहले एक महिला पर तेजाब फेंके जाने के मामले में कोर्ट ने ऐतहासिक फैसला देते हुए छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ उनपर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला न सिर्फ एसिड अटैक के मामलों में नजीर बनेगा बल्कि इसको एसिड अटैक के मामलों में सुनाई गयी सबसे बड़ी सजा बताया जा रहा है। इससे पहले दिल्ली के लक्ष्मी अग्रवाल केस में सात साल चली सुनवाई के बाद आरोपियों को दस साल की सजा सुनाई गयी थी।
मेरठ के शताब्दीनगर में रहने वाली महिला परतापुर के एक स्कूल में कार्य करती थी। मगर स्कूल संचालक महिला का यौन शोषण करने का प्रयास करता था। जिसके कारण महिला ने स्कूल छोड़कर शाॅप्रिक्स माल में एक कपड़े के शोरूम में नौकरी कर ली थी। इसी बात से खफा स्कूल संचालक अजब सिंह ने 22 नवंबर 2018 की रात करीब आठ बजे शताब्दीनगर में महिला के घर के पास अपने साथियों के साथ मिलकर महिला पर तेजाब फेंक दिया था। इस दिल दहला देने वाली घटना की जांच करते हुए पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इस मामले की स्पेशल जज एंटी करप्शन कोर्ट में सुनवाई हुई और पीड़िता के अलावा सात गवाह कोर्ट में पेश किए गए।
गुरुवार को स्पेशल जज एंटी करप्शन किरण बाला ने सभी छह दोषियों अजब सिंह, अंकित, रिंकू, रोहित, रवि और श्रवण को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ सभी आरोपियों पर तीन-तीन लाख रुपये यानी कुल 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एसिड अटैक के मामलों में मेरठ के न्यायालय द्वारा सुनाया गया फैसला अब तक की बड़ी कार्रवाई बताया जा रहा है। एसिड अटैक पीड़िता का केस लड़ने वाले एडीजीसी क्रिमिनल मुकेश मित्तल के अनुसार एसिड अटैक के मामलों में इतनी बड़ी सजा कहीं नहीं हुई है। यह कार्रवाई बाकी मामलों में नजीर बनेगी और महिलाओं के ऊपर किये जाने वाले तेजाब के हमलों में भी कमी आएगी। बताया गया कि इससे पहले 2005 में हुए दिल्ली के लक्ष्मी अग्रवाल तेजाब कांड केस में सात साल की सुनवाई के बाद 2013 में आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई गई थी।

