सुनील शर्मा
लो जी लो करलो बात, बस यही दिन देखना रह गया था। अब महाराज की सरकार पे नौकरी तो दी न जा रही और मजे ले रहे हैं दूसरी सरकार की दी नौकरियों पर। ये तो वही बात हुुई कि साइकिल चलावें हम, मजे लेवें महाराज। अब लोग मजे ले रहे हैं तो कर दिया ट्विट डिलीट लेकिन भईया जो बदनामी हो गयी उसे कैसे करेंगे डिलीट। अब लोग ‘भारतीय झूठ्ठा पार्टी’ बता रहे हैं तो गलत क्या है। सच न बोलोगे तो झूठ्ठा तो कहलाओगे ही न।
सरकार को झूठे वायदे करते देखा, बयानबहादुरों को बयान वापस लेते देखा, मगर जो देखना बाकी था वो महाराज की सरकार में देख लिया। अब पार्टी चार साल से राज कर रही है तो कुछ कर के तो दिखाना है न। अब कर नहीं पाये तो क्या किसी और के करे को अपना बता देंगे। अब महाराज की सरकार में तो भईया ये ही चल रहा है। साईकिल वाले भईया ने काम तो खूब कराये मगर सरकार में पूरे न कर सके। अब महाराज ने काम पूरे करा दिये तो श्रेय भी तो उनको ही जायेगा न। यहां तक तो बात कुछ समझ में भी आवे और न भी आवेे तो सरकार दे-देकर अखबारों-टीवी में विज्ञापन जबरदस्ती समझाने पर उतारू है। तो भईया समझना तो पड़ेगा और मानना भी पड़ेगा वरना विज्ञापनों में जो पैसा जा रहा है वो भी तो हमारा ही है न। तो भईया अपनी जेब का खर्च बढ़ावाने की बजाये हां में हां मिलाने में ही भलाई है। बाकी ये जो पब्लिक है न ये सब जानती भी है और वक्त आने पर समझा भी देती है।
अब बताओ भईया जै भी कोई बात हुई, साईकिल चलाते-चलाते नौकरी बांटी भईया जी ने और श्रेय ले रही महाराज की सरकार। एक भले मानस का वीडियो एडिट किया और उससे ही दिलवा डाला महाराज की सरकार को धन्यवाद। मजे की बात यह कि उसको नौकरी दी थी साईकिल वाले भईया ने और गुणगान करवा दिया महाराज की सरकार का। अब महाराज के ही ऑफिस ने पोस्ट किया ट्विट और कर दिया सरकार का गुणगान। लेकिन भईया, झूठ के पांव थोड़े न होवें जो चलता ही जायेगा, पकड़ी गयी महाराज की धांधली और जमकर हो गयी थू-थू। कमल का फूल खिलाना है चहूंओर की मंशा थी तमगा मिल गया गया ‘भारतीय झूठ्ठा पार्टी’ का। अब करना पड़ा वीडियो को डिलीट, खानी पड़ी मुंह की। अब जिम्मेदार भी कर्मचारियों को ठहरा दिया जायेगा, हो जायेंगे दो-चार सस्पेंड। मगर साहब, जो झूठ इतने सालों सेे चले आ रहे हैं उनपर पानी कैसे फेरेंगे। अब तो एक साल ही बचा है, कर लिजिये कुछ जनता के मन की वरना जनता भी तैयार बैठी है अपने मन की करने को। हाथ को साथ मिल रहा है तो साईकिल भी खूब तेज दौड़ रही है। हल खेतों की चौतरफा खुदाई कर रहा है और हाथी चिंघाडने को तैयार बैठा है। अब कमल जो है न बड़ा नाजुक होता है इस संभाल कर रखिये। जनता के विश्वास को धोखा न दीजिये वरना कमल सूखने में देर नहीं लगेगी।

