नई दिल्ली। आम जनता को महंगाई से राहत मिलने के संकेत सरकार की तरफ से दिए गए है। इस समय कच्चे तेल से लेकर पाम तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम में गिरावट का दौर शुरू है। इस समय औद्योगिक जिंसों की कीमतों में पहले से गिरावट हो रही है। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के बाद भारत का आयात बिल कम होगा और इससे चालू खाते के घाटे को नियंत्रित किया जा सकेगा। मई 2022 में खुदरा महंगाई दर 7.04 प्रतिशत रही जबकि अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 7.78 प्रतिशत दर्ज की गई। आरबीआइ का मानना है कि अगर क्रूड कीमत 105 डॉलर तक स्थिर रही तो वित्त वर्ष 2022 में महंगाई दर घटकर 6.7 प्रतिशत रहेगी।
कच्चे तेल का दाम घटने से पेट्रोलियम उत्पाद से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों में काफी कमी आएगी और खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे। इससे माल ढुलाई का खर्च भी कम होगा। जिससे खाने-पीने की वस्तुओं के दाम काबू में रहेंगे और ट्रांसपोर्टेशन पर होने वाले खर्च कम होंगे। पाम ऑयल कीमत कम होने से देश में खाद्य तेल के दाम कम होंगे। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है तो 65 प्रतिशत खाद्य तेल की पूर्ति आयात से की जाती है। उस आयात में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पाम ऑयल की है।
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पिछले एक महीने में कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दाम में 11.5 प्रतिशत तो पाम ऑयल की कीमत में 37 प्रतिशत तक की गिरावट हो गयी है। पाम ऑयल सस्ता होने से खुदरा महंगाई दर में भी 4.7 का भार रखने वाले खाद्य तेल के दाम और कम हो सकते है और बिस्कुट, पेस्ट जैसी घरेलू चीजें आने वाले महीनों सस्ती हो सकती है। इन सब वस्तुओं के उत्पादन में पाम ऑयल का प्रयोग होता है। एफएमसीजी कंपनियां भारी मात्रा में पाम ऑयल की खरीदारी करती हैं। कच्चे तेल के दाम आज 104 डॉलर प्रति बैरल से कम स्तर पर आ गए।पिछले एक सप्ताह में इसमें सात प्रतिशत से अधिक तो पिछले एक माह में 11.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। आने वाले समय में यह 65 डालर तक पहुंच सकती है। औद्योगिक जिंस स्टील, तांबा, शीशा, एल्युमीनियम, लौह अयस्क,जिंक के दाम में पिछले एक माह में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई । सरकार की ओर से स्टील के निर्यात पर शुल्क लगाने से घरेलू बाजार में स्टील के दाम कम हो रहे हैं।

