बाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

मेरठ रीजनबाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

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बाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

महानगर के प्रमुख बाजारों में लग रही ग्राहकों की भीड़
प्रशासन के पास नहीं है बाजारों में भीड़ रोकने की कोई नीति

मेरठ। जनपद मेरठ में कोरोना का कोप बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन सामने आने वाले आंकड़े दहशत फैला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी प्रदेश में लाॅकडाउन की अवधि बढ़कार प्रशासन को सड़कों पर अनावश्यक भीड़ को सख्ती से रोकने के आदेश दिये थे। मगर लाॅकडाउन होने के बावजूद मेरठ के प्रमुख बाजारों में खरीदारों की इतनी भीड़ पहुंच रही है कि देखकर कोरोना के फैलने का डर सताने लगता देता है। लेकिन कोरोना की रफ्तार को जल्द थामने का दावा करने वाला मेरठ का प्रशासन इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिये कोई नीति तक नहीं बना पाया है। ऐसे में कोरोना संक्रमण को फैलने से कैसे रोका जा सकता है इस बात का जवाब तो शायद प्रशासन के पास भी न हो। लेकिन यह तय है कि इन हालातों में लाॅकडाउन लगाने का भी कोई अधिक लाभ नहीं दिख रहा है।

बाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

आज रोज की तरह खैरनगर का दवा बाजार खचाखच भरा हुआ था। हालात यह थे कि वाहनों की बेतहाशा भीड़ के चलते कई बार जाम लग गये। निःसंदेह दवा खरीदना भी आवश्यक है लेकिन इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिये कोई सार्थक नीति बनाना भी जरूरी है। यदि वाहनों को ही बाजार के बाहर खड़ा करवा दिया जाये तो स्थिति थोड़ा नियंत्रण में आ सकती है। मगर प्रशासन का डंडा कुछ चैराहों पर गुजरने वालों पर बरसने तक ही सीमित है। कोरोना का प्रसार रोकने के लिये कोई प्रभावी नीति बनाने की न तो सोच दिखाई दे रही है न ही इच्छाशक्ति।

बाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

कोटला बाजार और शहर कबाड़ी बाजार के हालात तो और भी ज्यादा गंभीर थे। चारों ओर खरीदारों की भीड़, बाजार में पैर रखने तक की जगह नहीं और सामान जल्दी खरीदने की जल्दी में एक-दूसरे पर चढ़ते जा रहे ग्राहक। न दुकानदार को कोरोना की परवाह और न ही खरीदारों को संक्रमण फैलने का खौफ। लेकिन इस भीड़ में न जाने कितने लोग संक्रमित होंगे जो अंजाने में ही सही मगर कोरोना फैला रहे होंगे। इन लोगों से संक्रमित दुकानदार जब अपनी दुकानों से सामान बेचेंगे तो न जाने कितने ग्राहकों को कोरोना अपना शिकार बना लेगा। यह आशंका इन बाजारों में जुट रही भीड़ को देखते हुए बेमानी भी नहीं है।

बाजारों में भीड़, घरों में पहुंच रहा कोरोना

ऐसा नहीं है कि मेरठ के प्रशासनिक अधिकारियों को बाजारों में जुटने वाली भीड़ की जानकारी नहीं है मगर वह इसको गंभीरता से लेने को तैयार नहीं है। प्रशासन को चाहिये की वह ऐसी व्यवस्था करे की लोगों को बाजार मे कम से कम आना पड़े। इसके लिये होम डिलीवरी जैसी व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। मगर बेपरवाह प्रशासन इस ओर से अपनी आंखे मूंदे बैठा है और लोग कोरोना का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे में लाॅकडाउन की बंदिशें लगाने से भी कोई अधिक लाभ होता नहीं दिख रहा क्योंकि इन हालातों में तो कोरोना संक्रमण को फैलने से रोक पाना नामुमकिन ही दिखाई दे रहा है। बेपरवाह और दिशाहीन प्रशासन के कोरोना का प्रसार रोकने के दावों पर यकीन करना भी मुश्किल ही है। कोरोना मरीजों को इलाज दिलाने में नाकाम प्रशासन कम से कम कोरोना से सुरक्षा ही दिलवा दे।

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