टीम इंडिया ने कल रात हांगकांग की टीम को 40 रनों से हराया दिया, भारत को तो खैर जीतना ही था, उसकी जीत पर कोई हैरानी नहीं, जीत का मार्जिन भी काफी अच्छा रहा. टी-20 मैच में 40 रनों की जीत को बड़ी जीत माना जायेगा, सामने वाली टीम भले ही काफी छोटी हो. इस मैच में टीम इंडिया के लिए कई बातें काफी सकारात्मक रहीं वहीँ जब हम मैच का पोस्टमॉर्टेम करते तो कुछ ऐसी भी चीज़ें नज़र आती हैं जिनपर आलोचक कुछ सवाल तो उठा ही सकते हैं। मेरा काम इस मैच की एक निष्पक्ष समीक्षा करना है, आप भले ही किसी और एंगल से इसे लें.
चलिए हम पहले बात हांगकांग की करते हैं तो इस टीम के बारे में एक बात जो मैं कहना चाहूंगा वह यह है कि आप इसे एशिया की एक नयी उभरती टीम मान सकते हैं, कम से कम एसोसिएट्स देशों में हम इसे नंबर एक पर रखेंगे। यह बात हम इसलिए नहीं कह रहे हैं कि वह एशिया कप के लिए क्वालीफाई करके के आयी है, भले ही उसने किसी बड़ी टीम के खिलाफ कोई मैच नहीं जीता है लेकिन दो बार तो भारतीय आक्रमण की परीक्षा तो ली ही है. पिछले एशिया कप के बाद इसबार भी हांगकांग के बल्लेबाज़ों ने टीम इंडिया के आक्रमण का डटकर मुकाबला किया। बाबर हयात, किंचित शाह, ज़ीशान अली जैसे बल्लेबाज़ों ने बहुत ही निडरता से भारतीय आक्रमण का सामना किया। आप उनके बैटिंग स्कोर कार्ड पर अगर नज़र डालेंगे तो वह आपको काफी आकर्षक लगेगा। हां गेंदबाज़ी में ज़रूर उनका पक्ष काफी कमज़ोर है हालाँकि एहसान खान, यास्मीन मुतज़ा और आयुष शुक्ल ने भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान भी किया लेकिन उनके पास सूर्यकुमार के तूफ़ान से निपटने की क्षमता नहीं दिखी और यही वजह है कि मैच में 13 ओवरों भारतीय बल्लेबाज़ों पर काफी हद तक लगाने वाले हांगकांग के बल्लेबाज़ सूर्यकुमार की तपिश में पिघल गए.
अब बात टीम इंडिया की तो पहले अच्छी बातें और मैच की सबसे अच्छी बात यह रही कि विराट कोहली ने अपनी उस लय को इस मैच में आगे बढ़ाया जिसकी झलक उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में दिखाई थी. कई महीनों के बाद उनके बल्ले से निकला पचासा यकीनन उनमें एक नया आत्मविश्वास पैदा करेगा जिसकी विराट के साथ साथ टीम इंडिया को बड़ी ज़रुरत है. हालाँकि इस मैच में भी शुरू में विराट को शॉट खेलने में परेशानी हुई लेकिन आँखें जमते ही मैदान पर कोहली का वही विराट रूप दिखने लगा जिसका फैंस लम्बे समय से इंतज़ार कर रहे थे. उम्मीद की जानी चाहिए कि 4 सितम्बर को पाकिस्तान के खिलाफ सुपर 4 के संभावित मुकाबले में विराट का असली रूप नज़र आएगा.
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सूर्यकुमार, जितनी तारीफ की जाय कम है. क्या बल्लेबाज़ी करते हैं और इस मैच में भी क्या अंदाज़ दिखा है. मेरे हिसाब से तो क्रिकेट की दुनिया को नया ABD मिल गया है. मैदान का इऐसा कोई कोना नहीं जहाँ सूर्या की रौशनी न पहुँचती हो. चाहे सामने लगाया गया सिक्स हो या फिर कीपर के ऊपर से लगाया गया छक्का या फिर थर्ड मैन पर गेंद को 6 या 4 रनों के लिए दिशा दिखाना। और विशेषता यह कि यह सारे शॉट्स सूर्या बड़े ही परफेक्शन के साथ लगाते हैं. सूर्या वाकई टीम इंडिया का एक ऐसा हथियार बनते जा रहे हैं जिससे अब हर विपक्षी गेंदबाज़ कांपने वाला है.
अब कुछ बाते सवाल उठने वाली, तो भाई रोहित जी आपने विराट कोहली को क्या सोचकर गेंद थमाई, मैच में ऐसा तो कुछ था नहीं कि टीम के रेगुलर गेंदबाज़ विकेट न निकाल पार रहे हों या फिर हांगकांग के बल्लेबाज़ सारे गेंदबाज़ो की धुनाई कर रहे है और आपको प्रयोग करने की मजबूरी आ पड़ी हो. या फिर आपने प्रयोग जारी रखने की जो बात कही थी यह उसी की एक कड़ी थी, दूसरी बात आपकी लपरवाइयाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, पाकिस्तान के बाद इस मैच में आपने वही ग़लती की. आगे चलकर आपकी यह गलतियां भारी भी पड़ सकती हैं. इस मैच में अरश्दीप और आवेश की गेंदबाज़ी भी सवालों के घेरे में रही. दोनों ही अपने छोटे से कैरियर में अच्छी गेंदबाज़ी करते आ रहे हैं विशेषकर अर्शदीप लेकिन अचानक लय से भटकना उनकी क्रिकेट कैरियर की सेहत के लिए ठीक नहीं है. टीम के बाहर एक लम्बी लाइन लगी है. तो इस मैच के लिए इतना ही, आपके पास फिर आएंगे 4 सितम्बर को होने वाले संभावित भारत-पाक मैच की समीक्षा लेकर,तब तक दीजिये इजाज़त।

