पैसे लेकर 10 दिन बाद की कोविड नेगेटिव रिपोर्ट कर दी जारी
रिपोर्ट पर लगायी मुहर और डाॅक्टर के दस्तखत भी निकले फर्जी
रामनगर। एक ओर जहां उत्तराखंड सरकार प्रदेश को कोरोना से मुक्त कराने के लिये हरसंभव प्रयास कर रही है वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो पैसे के लालच में लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। रामनगर संयुक्त अस्पताल में सौ युवाओं की बिना जांच किये कोविड की फर्जी नेगेटिव रिपोर्ट जारी करने का मामला सामने आया है। 10 दिन पहले एडवांस में जारी की गयी फर्जी नेगेटिव रिपोर्ट पर लगायी गयी मुहर से लेकर डाॅक्टर के दस्तखत तक फर्जी हैं।
इस मामले में लैब टेक्नीशियन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे पद से हटा दिया गया है। इस मामले में कई और कर्मचारियों पर भी गाज गिरने की संभावना है।
27 दिसंबर को पौड़ी जिले के कोटद्वार में होने वाली सेना भर्ती में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को कोविड की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लेकर आना अनिवार्य किया गया है। रामनगर में एक फाउंडेशन के जरिए भर्ती की ट्रेनिंग ले रहे कई युवा रविवार को कोविड जांच कराने के लिये रामनगर संयुक्त अस्पताल पहुंचे।
वहां लैब कर्मचारियों ने उनसे कोविड नेगेटिव रिपोर्ट देने के लिये एक हजार रुपये तक मांग लिये। किसी भी हाल में कोविड नेगेटिव पाने की चाह में युवाओं ने पैसे दे दिये तो लैब कर्मचारियों ने उन्हें कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट दे दी। इन जारी की गई फर्जी रिपोर्ट में मुहर से लेकर दस्तखत तक फर्जी हैं।
सोमवार को युवाओं ने रिपोर्ट देखी तो उनमें मुहर के साथ-साथ डाॅक्टर के दस्तखत भी अलग-अलग मिलने पर उन्हें संदेह हुआ। रिपोर्ट लेकर युवा अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल के डाॅक्टर राकेश ने जारी की गई कोरोना रिपोर्ट की कोई जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। डाॅक्टर राकेश ने उक्त रिपोर्टों पर लगी मुहर और दस्तखत उनके न होने की बात कही।
वहीं नेगेटिव रिपोर्ट पर डाली गयी तारीख देख अस्पताल प्रशासन भी हैरत में पड़ गया। लैब कर्मचारियों ने रिपोर्ट में जांच की तारीख 20 से 27 दिसंबर लिखी थी, जबकि युवाओं ने 10 और 12 दिसंबर को कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट बनवाई थी। यानि लैब कर्मचारियों ने करीब 15 दिन एडवांस में ही नेगेटिव रिपोर्ट जारी कर दी।
रामनगर अस्पताल प्रबंधन ने लैब टेक्नीशियन को पद से हटा दिया है। फर्जी कोरोना रिपोर्ट युवाओं को दिये जाने के बारे में लैब कर्मचारियों से जानकारी ली जा रही है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
सीएमओ नैनीताल डाॅ. भागीरथी जोशी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फैल रहे कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच ऐसी हरकतें सही नहीं है। इससे और लोगों को भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। उन्होंने इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही।

