चिताओं की तपिश से निकली जीत आपको मुबारक हो

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चिताओं की तपिश से निकली जीत आपको मुबारक हो

सुनील शर्मा

बधाई हो नेताजी, आप सबको बधाई हो। आप चुनाव लड़े, कहीं कोई जीता, कहीं कोई हारा। लेकिन बधाई सभी को, जीत-हार की नहीं आपने जो अपने ही समर्थकों की चिताओं की आग में तपकर चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाई उसके लिये आप सभी को हार्दिक बधाई। बड़ा मुश्किल होता है कि जिस जनता ने आप पर भरोसा किया हो उसी की जिंदगी को दांव पर लगा कर आप चुनाव लड़ने का हौसला दिखा सकें। मगर आप सभी ने यह कर दिखाया कि इसके लिये आप सभी बधाई के पात्र हैं। अब भले ही अस्पतालों के बाहर बेड पानेे को मरीज चिल्लाते रहें, बिना ऑक्सीजन के लोग तड़प-तड़प कर मरते रहें, मगर आपने तो इन सब बातों की परवाह न करते हुए चुनाव लड़ने की हिम्मत दिखाई न। और जंग में जानें तो जाती ही हैं तभी तो इतिहास लिखा जाता है। और आप सभी देशभक्त नेताओं ने जो इतिहास लिखा है वो कभी भूला नहीं जा सकेगा।

हम सुनते आये थे की रणभूमि में कोई बंधु-बांधव नहीं होता। विजय श्री की राह में जो आये वो शत्रु और जो साथ खड़ा हो वो दोस्त होता है। मगर इस चुनावी रणभूमि में तो आप सभी ने शत्रु के साथ अपने समर्थकों की जिंदगी को भी दांव पर लगाने में जरा भी नहीं हिचक महसूस नहीं की। आपने कोरोना को मात देते हुए चुनावी रैलियां कीं, खुद तो मास्क पहना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया और जनता की अपार भीड़ का उत्साह बढ़ाते रहे। और यही तो है असली नेता की पहचान जो जीत हासिल करने के लिये सबकुछ दांव पर लगा दे चाहे वो उसके समर्थकों की जिंदगी ही क्यों न हो। और वो समर्थक क्या जो अपने नेता के लिये जान को दांव पर न लगा सके।

देश में हुए चुनाव में आप सभी नेताओं नेे जो इतिहास रचा है वह देश ही नहीं दुनिया भर में मिसाल बनकर कायम रहेगा। जब-जब इस देश में कोरोना संकट का इतिहास लिखा जायेगा तब-तब आपके हौंसलों का जिक्र भी किया जायेगा। जमीन पर बिछने वाली लाशों और जलती चिताओं की प्रबल संभावनाओं के बावजूद चुनावी समर में उतरने के साहसिक फैसले की ‘दाद’ दी जायेगी। इस चुनावी समर में भले ही सभी राजनीतिक दल, शत्रु के रूप में एक-दूसरे के सामने खड़े थे मगर उनकी एकता की मिसालें दी जायेंगी कि किसी ने भी यह नहीं कहा कि इन चुनावों को आगे बढ़ाकर जनता का जीवन बचाया जाये। अब यही तो होते हैं असली योद्धा जो एक बार चुनावी रणभूमि में कदम रख दें तो वापस खींचने की बात भी नहीं सोच सकते। और खुद करना क्या है, जनता से दूर, सेफ मंच पर से चंद बातें कह जनता का दिल जीतना है। अब चुनाव भी जनता लड़ेगी और कोरोना का भी मुकाबला जनता ही करेगी। जिंदगी भी जनता ही गवांएगी और अपने परिवार को भी खतरे में जनता ही डालेगी। क्योंकि नेताजी ने कहा है तो जनता तो अपना सर्वस्व दांव पर लगा ही देगी।

कोरोना काल में देश की तथाकथित समझदार जनता का भी जिक्र जरूर किया जायेगा कि उन्होंने अपने नेताओं के प्रति प्रेम जाहिर करने के लिये कोरोना की फिक्र भी नहीं की। अपने साथ अपने परिवार की जान भी दांव पर लगा दी। चुनावी रैलियों में जा-जाकर पूरे देश को कोरोना के खतरे में डालने में जरा भी पीछे नहीं हटे। हां, अब चुनाव के परिणाम के साथ कोरोना के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अब तक नेताजी की जय के नारे लगाने वाली जनता, हाय अस्पताल, हाय बेड और हाय ऑक्सीजन चिल्लाती नजर आयेगी। अब जनता दोष देगी नेताजी को और नेताजी अपने सेफ जोन में बैठकर बढ़ते कोरोना संक्रमण की चिंता करते नजर आयेंगे। जो जीते वो जश्न मनायेंगे और जो हार गये वो भला लौटकर क्यों आयेंगे। रह जायेगी जनता, जिसने नेता प्रेम में खुद अपनी जिंदगी को खतरे में डाल दिया।

और नेताजी जनता का क्या है वो तो हमेशा से ही आप जैसे नेताओं पर भरोसा कर जान गंवाती आयी है। कभी महामारी मारती है तो कभी आतंकवादी, कभी भूख मारती है तो कभी प्यास। कहीं दवाओं की कालाबाजारी मारती है तो कहीं इलाज न मिलने के कारण जनता जान गंवाती है। फिर भी जनता आपके वादों पर भरोसा करती है, आपको वोट देती है और फिर आपके वादों के पूरा होने का इंतजार करती है। आप भले ही लाशों पर राजनीति कर सकते हों मगर जनता तो आपको ही भगवान समझती है जो सभी कष्टों से मुक्ति दिला सकता है। तो अगर संभव हो सके तो अब आप देश की जनता के बारे में भी सोचिये। कोरोना से मरते लोगों को बचाने की कोशिश किजिये। चुनावी योद्धा के रूप में तो आपने खुद को साबित कर दिया अब देश का नेता होने का फर्ज भी निभा दीजिये। बचा लिजिये लोगों की जान और साबित किजिये की आपको देश की जनता की सच में ही चिंता है। क्या आप सभी नेता कर पायेंगे ऐसा…

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