विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन को मिली हार के साथ लगता है अखिलेश यादव की अपने सहयोगियों में दिलचस्पी खत्म होती जा रही जा रही है तभी तो उन्होंने एक एक कर अपने सहयोगियों से दूरी बनानी शुरू कर दी है. महान दल ने पहले ही उपेक्षा और अनदेखी का आरोप लगाकर सपा का छोड़ दिया था और अब सपा और सुभासपा के बीच भी दूरियां बढ़ती ही जा रही हैं, एक तरफ जहाँ सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव पर लगातार हमले बोल रहे हैं वहीँ सपा प्रमुख उनकी लगातार उपेक्षा करते नज़र आ रहे है. कल राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा लखनऊ आये हुए थे, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने लखनऊ में उनका स्वागत किया। सपा कार्यालय में इस मौके पर प्रेस वार्ता भी हुई, अखिलेश के साथ जयंत चौधरी भी यशवंत सिन्हा के समर्थन में मौजूद थे लेकिन ओम प्रकाश राजभर कहीं नज़र नहीं आ रहे थे.
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आज उन्होंने इसी बात को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा है. राजभर ने कहा कि मैं अखिलेश यादव के फ़ोन का घंटों इंतज़ार करता रहा लेकिन उनका फ़ोन नहीं आया और न ही उन्होंने हमारा फ़ोन उठाया. मऊ में कार्यकर्त्ता सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए वहीं राजभर ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि अखिलेश यादव को इसपर विचार करना है कि वो ये गठबंधन जारी रखेंगे या नहीं रखेंगे. राजभर ने कहा कि हमारी तरफ से तो गठबंधन जारी है, अखिलेश चाहें तो सुभासपा को अपने से अलग कर सकते हैं. ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि उन्होंने शिवपाल यादव से भी बात की थी कि आप क्यों नहीं गए तो उन्होंने भी यही कहा कि हमें बुलाया ही नहीं गया. सुपभासपा प्रमुख ने कहा कि शिवपाल यादव ने कहा कि उन्हें हमारी वोट की जरूरत नहीं है. यशवंत सिन्हा के समर्थन पर सुभासपा प्रमुख ने कहा कि 12 जुलाई को राष्ट्रीय कमेटी के लोग यह तय करेंगे कि किसे समर्थन करना है.

