हालात नहीं, दिमागी केमिकल लोचा है सुसाइड की असली वजह

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हालात नहीं, दिमागी केमिकल लोचा है सुसाइड की असली वजह

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के बाद पुलिस और मीडिया इसके पीछे किसी शख्स या हालात जैसी कई वजहें तलाश रही है. वहीं साइकोलॉजिस्ट्स की नजर में सुसाइड के पीछे की वजहें कोई हालात या कोई शख्स नहीं होता. डॉक्टर बार-बार सुसाइड का विचार आने के पीछे दिमाग में होने वाले केमिकल लोचे को बड़ी वजह मानते हैैं. उनका कहना है कि सुसाइड करने वाला कुछ सिंप्टम्स देता है और समय रहते इन्हें पहचान लिया जाए तो उसकी जिंदगी को बचाया जा सकता है. आइए जानते हैैं सुसाइड के पीछे के कारण और किस तरह सुसाइड का विचार आने से परेशान लोगों को इससे निकाला जा सकता है.

ये मेडिकल इमरजेंसी है
इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमेन बिहैवियर एंड एलाइड साइंसेज के साइकोलॉजिस्ट डॉ. ओमप्रकाश कहते हैैं कि सुसाइड का विचार आना किसी हालात या शख्स के कारण नहीं होता. ये पूरी तरह केमिकल लोचा है. ये बायोलॉजिकल और मेडिकल कारणों से होता है. सुसाइड को मेडिकल इमरजेंसी की तरह लेना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को बार-बार सुसाइड करने के विचार आ रहे हैैं तो ये एक तरह की साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है. लेकिन अगर ये विचार इतने ज्यादा हो रहे हैैं कि व्यक्ति हर हाल में खुद को मारना चाहता है तो ये एक मेडिकल इमरजेंसी है.

दवा से ज्यादा थेरेपी की जरूरत
डॉक्टर के मुताबिक, अगर इस तरह की गंभीर मानसिक समस्या से जूझ रहा व्यक्ति साइकोलॉजिस्ट के पास जाता है तो उसे भर्ती करके इलाज करना चाहिए. साइकोलॉजी में इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी (ईसीटी) समेत कई अन्य थेरेपी से इसका करना किया जा सकता है. ऐसे मरीजों में काउंसिलिंग या दवाएं उतनी कारगर नहीं होतीं, जितनी थेरेपी.

ऐसे लोगों को जानना जरूरी है

साइकोलॉजी में सुसाइड के पीछे कोई हालात या वजह कभी नहीं होती. देश में ऐसे कई लाख लोग हैैं, जो ऐसे या बुरे हालातों में जी रहे हैैं, लेकिन वो सुसाइड का कदम नहीं उठाते. हालांकि जो लोग लंबे समय से एंग्जाइटी या डिप्रेशन से जूझ रहे हैैं और इसका इलाज करा रहे हैैं उनमें सुसाइड के विचार आएं तो इसे समझने और मेडिकल इमरजेंसी की तरह लेना बहुत जरूरी है.

क्या है ये केमिकल लोचा?

दिमाग में जब सेरोटोनिन का लेवल कम हो जाता है तो इंसान के मन में सुसाइड का ख्याल आता है. डिप्रेशन, नेगेटिविटी, सुसाइडल थॉट्स जब भी दिमाग में आने लगे तो समझ जाएं कि ब्रेन में सेरोटोनिन की कमी हो गई है. साइकोलॉजिस्ट्स का कहना है कि हमारे दिमाग में करोड़ों सेल्स होते हैैं और इनमें कई तरह के केमिकल्स होते हैैं. सेरोटोनिन भी एक तरह का केमिकल होता है जो दिमाग को शांत और खुश रखता है. सेरोटोनिन की कमी से व्यक्ति डिप्रेशन से घिर जाता है और नतीजा सुसाइड तक पहुंच सकता है.

क्यों लोग आत्महत्या करना चाहते हैं?

  • किसी अपने की मौत पर उसके खो जाने के दर्द की भावना
  • किसी के रिश्ते के टूट जाने पर या तलाक होने पर
  • निजी रिश्ते में किसी प्रकार की समस्या होने के कारण
  • किसी प्रकार के दुव्र्यवहार होने पर
  • जीवन में कोई भी लक्ष्य न होने पर
  • अपने जीवन पर कोई कंट्रोल न होने पर
  • व्यापार या नौकरी में कोई घाटा होने पर

अगर आपके मन में आए सुसाइड का ख्याल तो क्या करें?

  • कुछ भी बुरा करने से पहले किसी अपने के साथ बैठकर अपने मन की बात कहें. आत्महत्या करने की चाह रो लेने पर या बात करने पर कम हो जाती है.
  • अपने परिवार के लोगों या दोस्त के साथ दिल खोलकर बात करो. अगर नहीं कर पा रहे हैं तो किसी काउनसेलर या मनोवैज्ञानिक डॉक्टर से सलाह लें और उन्हें अपने दिल की सारी बात बताएं.
  • खुद को अहमियत देने का मिशन. इसके लिए आप अपने बारे में कुछ अच्छी बातें लिख कर दीवार पर लगा दें. जो भी कुछ करने का मन कर रहा है वह पहले करें. उन लोगों से मिलें जिन्हें आप चाहते हैं.
  • ताजी हवा में सुबह सैर के लिए निकलें इससे आपके मन का नकारात्मक मनोभाव चला जाएगा.
  • कोई जिम ज्वाइन करें या स्पोर्ट खेलें, इससे मन की अवस्था बेहतर होती है.
  • नई भाषा सीखें या कोई हॉबी ट्राई करें. जो भी अच्छा लगे आपके मन को वही काम करें, इससे आप बेहतर फील करेंगे.
  • किसी गरीब की मदद करें, इससे आपके दिल को बहुत सुकून मिलेगा. लोगों के विश्वास और भरोसे से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं.
  • उनकी आत्महत्या करने की बात को अहमियत दें क्योंकि वे दूसरों के समक्ष कुछ न कुछ इशारा जरूर देते हैं.

सुसाइड करने जा रहे व्यक्ति को कैसे रोकें?

  • जब वह इंसान अपने दिल की बात कहे तो मन लगाकर सुने और उसे इस बात का अहसास करवाएं कि वह हर समस्या को काबू में ला सकता है.
  • उसको कभी भी अकेलापन का एहसास न होने दें हमेशा उसका साथ देने की कोशिश करें.
  • उसे उसकी सफलताओं का ध्यान करवाएं. उसके लक्ष्य और काम के बारे में बताएं. उसके सपने के बारे में बताएं. उसे इस बात का अहसास करवाएं कि जीवन कितना अच्छा है, व्यर्थ में न गवाएं.
  • अगर इनमें से कोई भी कोशिश काम नहीं कर रहा है तो तुरंत काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट के पास ले जाएं.

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