मेरठ। आज भाजपा और यूपी की राजनीति के लिए 37 साल एक एतिहासिक दिन आया है। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। 37 साल बाद यह पहला मौका है जबकि कोई मुख्यमंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए लगातार दूसरी बार शपथ ले रहा है। ये करिश्मा भी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही संभव हो पाया। बहुत कम लोग जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय बिष्ट हैं। उत्तराखंड के अजय बिष्ट से लेकर आज मुख्यमंत्री बनने तक उन्होंने काफी बड़ा सफर तय किया है। अजय बिस्ट से वे नाथ सम्प्रदाय के सबसे बड़े पीठ गोरक्षपीठ के महंत बने और उसके बाद देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमन्त्री।
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हिंदुत्व के सबसे बड़े पोस्टर ब्वाय :
हिन्दुत्व के बड़े पोस्टर ब्वाय बने इस योगी की कहानी उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले के पंचूर गांव से आरंभ होती है। जहां पर 1972 साल की जून की 5 तारीख को गाँव के रहने वाले आनन्द सिंह बिष्ट और सावित्री देवी के घर बच्चे का जन्म हुआ। इस बच्चे का नाम अजय बिष्ट रखा। सात भाई बहनों में पाँचवे नंबर के अजय बिष्ट ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित से बीएससी की। इसके बाद वे 1993 में गणित में एमएससी करने के लिए गोरखपुर आए। बस यहीं अजय बिष्ट का टर्निंग पॉइंट था। यही से वो गोरक्षपीठ के मठाधीश और महंत अवैद्यनाथ से जुड़े। इसके बाद अजय बिष्ट का नाम और परिचय दोनों पुराने होते गए। अजय का नाम योगी आदित्यनाथ और उनका परिचय गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में होने लगा।
अजय ने जब अवैद्यनाथ से सन्यासी बनने की इच्छा जताई तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने फिर महंत अवैद्यनाथ से सन्यासी बनने की इच्छा जताई। इसके बाद 1994 की 15 फरवरी को अवैद्यनाथ ने उन्हें दीक्षा देकर अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बना बना दिया।
1996 में रखा राजनीति में कदम :
योगी आदित्यनाथ(CM Yogi Adityanath) 1996 में राजनीति में कदम रखा और लोकसभा चुनाव में महंत अवेद्यनाथ के चुनाव का संचालन अच्छे से किया। 1998 में महंत अवेद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। इसी के साथ ही लोकसभा चुनाव का प्रत्याशी बना दिया। योगी महज़ 26 वर्ष की उम्र में सासंद बन गए।
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बढ़ता गया राजनीतिक कद :
वर्ष 2007 के प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा में मतभेदों के चलते योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने अपनी पार्टी हिन्दू युवा वाहिनी से प्रत्याशी खड़े कर दिए। इससे भाजपा में हड़कंप मच गया। आख़िरकार भाजपा शीर्ष नेतत्व योगी के सामने झुक गया। इसके बाद योगी का कद बढ़ता चला गया।

