पूर्व सीएम पर मामला टाल कर झाड़ लिया पल्ला
पूर्व और वर्तमान सीएम की तकरार आयी सामने
देहरादून। सत्तारूढ पार्टी के मुख्यमंत्री राज्य में हुए घोटाले को लेकर पूर्व सरकारों को जिम्मेदार ठहराते आयेे हैं। मगर उत्तराखंड की तो बात ही निराली है। यहां के सीएम ने तो अपनी ही पार्टी के पूर्व सीएम को राज्य में हुए फर्जी कोविड टेस्ट घोटाले का जिम्मेदार ठहरा दिया। इतने गंभीर मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए सीएम रावत ने कहा, ये मेरे समय का मामला नहीं है। यानि अप्रत्यक्ष रूप से पूर्व सीएम को ही जिम्मेदार ठहराने में कोई कसर वर्तमान सीएम ने नहीं छोड़ी। इस मामले को लेकर भाजपा के पूर्व और वर्तमान सीएम के बयान पार्टी में चल रही अंदरूनी तकरार को बयां करने के लिये काफी हैं।
अप्रैल में हुए हरिद्वार कुंभ के दौरान कोविड जांच करने के लिये नियुुक्त टेस्टिंग लैब ने पंजाब, राजस्थान हरियाणा राज्यों के डेटाबेस लेकर फर्जी टेस्ट दिखाए थे। फर्जीवाड़ा इस कदर हुआ कि कई ऐसे लोगों के भी कोविड टेस्ट दिखा दिये गये जिनके ना तो कोविड टेस्ट हुए और ना ही वे हरिद्वार कुंभ मेले में आए थे। इस मामले में हरिद्वार के सीएमओ की ओर से मैक्स काॅर्पोरेट सर्विस, दो दिल्ली की लालचंदानी और हिसार की नालवा लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इस मुद्दे को लेकर जब विपक्षी दलों ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाने शुरू किये तो भाजपा के दो सीएम के बीच की तकरार जगजाहिर हो गयी। एक ओर जहां पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फर्जी टेस्ट मामले पर एसआईटी की जांच करने की मांग की है। वहीं वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का कहना है कि फर्जी टेस्ट का मामला उनके समय का नहीं है वह तो मार्च में मुख्यमंत्री बने थे। सीएम तीरथ ने इस गंभीर मामले से पल्ला झाड़ते हुए अप्रत्यक्ष रूप से पूर्व सीएम के कार्यकाल को ही घोटाले के लिये जिम्मेदार ठहरा दिया है। वर्तमान मुख्यमंत्री का इस मामले की जांच करवाने और दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कहने की बजाये पूर्व सरकार के पाले में गेंद सरकाना चर्चा का विषय बना हुआ है।

